“आरक्षण एक अभिशाप” : पुष्पेन्द्र कनौजिया

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अंबेडकर ने आरक्षण की मांग 10 वर्ष के लिए इसलिए की थी क्योंकि उस समय पर एससी एसटी वर्ग के लोग बहुत ही बिछड़े चल रहे थे । संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के लिए 10 साल यानी 1960 तक आरक्षण का प्रावधान किया था…..पढिए पुष्पेन्द्र कनौजिया के नमनयोग्य विचार. 

हमारे भारत में भारत का संविधान मानने वाले भारत के सभी लोगों में से सबसे ज्यादा SC/ST वर्ग के लोग है। लेकिन वह यह बात मानने को तैयार ही नहीं की डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने आरक्षण की मांग 10 वर्ष के लिए इसलिए की थी क्योंकि उस समय पर एससी एसटी वर्ग के लोग बहुत ही बिछड़े चल रहे थे । संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के लिए 10 साल यानी 1960 तक आरक्षण का प्रावधान किया था। बाद के नेता उनके सुझाव दरकिनार करके आज तक इसे बढ़ाते गए। अम्बेडकर का प्रावधान पर्याप्त था क्योंकि दलितों को संसद या विधान भवन में जाने के लिए कोई डिग्री, कोई योग्यता या क्षमता की आवश्यकता नहीं थी, उनमें आत्मविश्वास पैदा करने का प्रयास तक नहीं किया गया।और उन्होंने यह भी कहा था कि जब 10 वर्ष पूर्ण हो जाए तो आरक्षण हटा कर सब को समान रूप माना जाएगा।
लेकिन यह आरक्षण एससी एसटी वर्ग के लोगों के लिए भी एक अभिशाप साबित हुआ है । इसको लोग माने या ना माने यह एक कड़वा सच है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी दो बच्चों को 10 सवाल याद करने के लिए दिए गए ।और कहां गया कि आप दोनों लोग रामू और श्यामू 10 सवाल याद करके आना है । वही रामू को बुलाकर यह कह दिया अगर आप 5 सवाल भी याद कर लेते हैं तो आप पास कर दिए जाएंगे। वही श्यामू पर 10 सवाल याद करने का प्रेशर डाल दिया इससे क्या होता है । कि जो रामू लड़का है उसके मानसिकता में यह पड़ गया कि अगर मुझे मेरे 5 सवाल भी सही है तो मैं पास हो जाऊंगा। अब रामू का पढ़ाई स्तर धीरे-धीरे गिर रहा है । क्योंकि उसको यह लगता है कि अब तो वह पास ही हो जाएगा । और वही श्यामू दिन रात पढ़कर 10 सवालों में से 8 सवालों के उत्तर देकर भी सेकंड रह गया । वही रामू 10 सवालों में से 5 सवाल के उत्तर देकर भी फर्स्ट डिवीजन पास हुआ। दोनों में से पढ़ाई का स्तर श्यामू का ज्यादा है । लेकिन श्यामू एक अभिशाप की वजह से आगे नहीं जा सकता। वही रामू जो कि 10 में से 5 सवालों का ही उत्तर दे पाया था । उसको कोई सरकारी नौकरी प्राप्त हो गई लेकिन क्या रामू खूब अच्छी तरीके से इस भारत को आगे बढ़ा पाएगा । यह एक सोचने का विषय है। मैं यह नहीं कहता कि रामू पढ़ने में कमजोर है उसे कमजोर कर दिया गया है । उसको आरक्षण का लालच देकर एक दीमक की तरह अंदर ही अंदर कुतर दिया है । जो कि भारतवर्ष के नौजवानों के लिए एक चिंतनीय विषय है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि आरक्षण से सिर्फ सामान्य वर्ग को ही नुकसान है तो आप गलत सोच रहे हैं इसमें सबसे ज्यादा नुकसान अति पिछड़े वर्ग वाह पिछड़े वर्ग का है क्योंकि इस आरक्षण की सहारे हमारे अति पिछड़े वर्ग व पिछड़े वर्ग के नौजवानों का पढ़ाई स्तर दिन पर दिन गिरता जा रहा है। क्योंकि हमारी मानसिकता यह हो गई है कि चलो हम तो पास हो ही जाएंगे । अगर पास ना हुए तो हमारा आरक्षण में नाम आ जाएगा इससे हम पढ़ाई करने में कोताही बरतनी लगते हैं। और यही आगे चलकर हमारे लिए एक अभिशाप साबित होता है।
आरक्षण से ही भारत को बहुत बड़ा नुकसान पहुंच रहा है जैसे कि अब अच्छे भले लोग भी यह चाहते हैं कि मुझे कमजोर कहां जाए या मुझे आरक्षण दिया जाए।

 

Anil Anup

Anil Anup

राज्य ब्यूरो प्रभारी पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर l

One thought on ““आरक्षण एक अभिशाप” : पुष्पेन्द्र कनौजिया

  • September 16, 2018 at 10:35 am
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    Very nice talking

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