लखनऊ साहित्य महोत्सव में हुआ अंकुर कि किताब “क्विटिंग शुड नॉट बी एन ऑप्शन’ का विमोचन

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अपनी किस्मत, संसाधनों की कमी और भाग्य को कोसना और दोष देना बहुत आसान है लेकिन जब आप कठिन परिश्रम करते है और उनका सामना करके उन्हें उखाड़ फेकतें है, तभी आप विजेता कहलाते हैं । सभी बाधाओं को दूर करके खुद के लिए मार्ग प्रशस्त करना और अलग चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करना सफल जीवन की पहचान होती है । अंकुर मिश्रा का व्यक्तित्त्व कुछ इसी तरह का है, अंकुर उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से आते हैं बचपन बहुत ही संघर्षशील रहा मगर उनका अडिग खड़ा रहना उनकी पहचान बन गया ।

उद्यमी, लेखक, फोटोग्राफर, कवि और सामाजिक कार्यकर्ता केवल कुछ ऐसे शब्द हैं जो हमें इस महत्वाकांक्षी व्यक्ति के जीवन के बारे में बताते हैं। एक बेहद प्रगतिशील विचारक और व्यक्ति, जो गतिशीलता को परिभाषित करता है और आज के युवाओं को आगे बढ़ाता है। उन्होंने कई डिजिटल मार्केटिंग टेक्नोलॉजी प्लेटफार्मों का अकेला नेतृत्व किया है और वर्तमान में डिजिटल मार्केटिंग कंपनी फोरेंटेक के संस्थापक / सीईओ हैं। दिल से एक कवि और व्यंग्यकार जो कठिन से कठिन बात भी सरलता के साथ सुन लेते हैं।

‘क्विटिंग शुड नॉट बी एन ऑप्सन’ अंकुर की पांचवी किताब है जिसका विमोचन लखनऊ साहित्य महोत्सव में किया गया। किताब एक व्यक्ति की जिंदगी के इर्द गिर्द घूमती है जो सत्य घटनाओ पर आधारित है ।
लेखक किताब के जरिये समाज को एक सन्देश देना चाहता है की इंसान को कठिनाइयों को देखकर भागना नहीं चाहिए उनका सामना करना चाहिए । संघर्ष जीवन का एक हिस्सा होता है इंसान को संघर्ष से घबराना नही चाहिए। किताब की कहानी एक लड़के के बारे में हैं जो एक वक्त में कई कठिनाइयों से गुज़र रहा है। वह अपने परिवार के एक इकलौता इनकम का जरिया है, उसका खुद का व्यवसाय है और उसकी जल्द ही शादी होने वाली है। उसकी ज़िन्दगी में सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा होता है, मगर अचानक एक दिन में सब कुछ बदल जाता है एक गलत निर्णय व्यवसाय को कर्ज में डाल देता है, उसकी शादी में व्यवधान आ जाता है और उसका परिवार बीमार होकर अस्पताल में चला जाता है । किताब में लेखक ने बताने की कोशिश की है की इस दशा में क्या करना चाहिए – जिंदगी से भागना या उसका सामना करना ।

एक व्यवसायी होने के नाते लेखक ने बताना चाहा है की उसकी जिंदगी कैसी होती है, वो खुद को कैसे पालता है ! “Entrepreneurship is a lonely journey. You are responsible for sustaining yourself. As an employee, you’ll still get paid if you don’t go to work, take a holiday or get sick. As an early-stage entrepreneur, any absence or mistake can cost you basic security. When you go out on your own, there’s no one outside of yourself that you’re relying on. That brings stress and loneliness.”

अंकुर ने अब तक पांच किताबे लिखी है, जिसमे इसके पहले तीन कविताओं की किताबें हैं और एक नावेल ।अंकिर सोसल मिडिया पर भी काफी चर्चा में रहते है, उनके ब्लाग और व्यंग लोगो द्वारा सराहे जाते है ।

अंकुर एक अच्छे वक्ता भी है जिन्होंने देश के बड़े बड़े टेड एक्स जैसे मंचो पर अपने वक्तव्य रखे हैं।
राजनीती की बातो में अंकुर ने हमेशा एक आलोचक की भूमिका निभाई है, जो की आज की राजनीती के लिए बहुत जरूरी है ।

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