लाखों की नौकरी छोड़कर क्यों शुरू की अंकुर मिश्रा ने खुद की कंपनी

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कहतें है कि मंजिल चाहे कितनी भी उंची क्यो ना हो रास्ते हमेशा पैरों के नीचे होते है.
इस बात को सच साबित किया है अंकुर मिश्रा ने.अंकुर मिश्रा जो उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव जिटकरी (जहाँ पर अंकुर का बचपन गुजरा) के हैं अपनी प्रतिभा और मेहनत दम अपनी पहचान बनाई है. अंकुर मिश्रा एक आई0टी0 कंपनी फॉरेन टेक के संस्थापक हैं और साथ ही नए कवियों को प्लैटफॉर्म देने के लिए कविशाला नाम कि एक ऑनलाइन वेबसाइट की शुरुआत भी की है. जिसमे देश भर के तमाम नए कवि अपनी कविता शेयर करते हैं.
उत्तर प्रदेश राज्य में बुल्देनखण्ड के हमीरपुर जिले के एक छोटे से गांव जिटकरी में अंकुर मिश्रा का जन्म हुआ हुआ. जहाँ पर न तो लाइट है, न पक्की सड़क और न ही अन्य संसाधन. ऐसे में अंकुर का शुरुआती समय बहुत ही संघर्षमय रहा. लेकिन अंकुर के हौसलों और इरादों ने हर कमी को अपनी ताकत बना लिया.

ankur mishra nwz mirror
अंकुर मिश्रा

नयी चीजों को सीखने और जानने की जिज्ञासा ने अंकुर को जीवन में हमेशा आगे बढ़ाये रखा.
लाइट न होने की वजह से दिए कि रोशनी में पढाई करना, रफ/रजिस्टर न होने पर अख़बार में गणित के सवाल हल करना अंकुर के लिए संघर्ष था लेकिन अंकुर इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं समझी.
अंकुर का सपना एक आई0ए0एस० बनना था. प्रारंभिक शिक्षा से लेकर इण्टर तक कि पढाई सरकारी स्कूल से करने के बाद अंकुर के पिताजी ने अंकुर को इंजीनियरिंग कि पढाई करने के लिए कहा. लेकिन आर्थिक समस्या होने कि वजह एक अच्छे इंजीनिरिंग कॉलेज में एडमिशन होना कठिन था. लेकिन भाग्यवश अंकुर को एजुकेशन लोन मिल गया और उसने नोएडा के एक इंजीनिरिंग कॉलेज में बी टेक में दाखिला ले लिया.
इंजीनिरिंग ख़त्म करने के बाद अंकुर ने पहले नौकरी के लिए संघर्ष किया लेकिन नौकरी उसे राश नहीं आयी. फिर उसने फॉरेन टेक कंपनी कि शुरुआत की. शुरुआती दौर में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन आखिर में अंकुर का काम चलने लगा.
अपने स्ट्रगल के समय में अंकुर ने 6 किताबें भी लिखीं जिनमे कुछ नावेल हैं और कुछ कविता संग्रह.
अपनी कविता को व्यवस्थित रखने के लिए अंकुर ने कविशाला नाम की एक वेबसाइट बनाई. शुरू में कविशाला में वह पहले खुद की कवितायेँ ही लिखता था. लेकिन धीरे धीरे अन्य लोगों ने भी अपनी कवितायेँ भेजनी शुरू कर दीं. और इस तरह से कविशाला नए कवियों के लिए एक अनोखा मंच बन गया.

kavisha forean techकविशाला में लगभग 30 हजार कवि कविताओं को पढ़ते हैं और अपनी कविताओं को साझा करते हैं.
कविशाला ने देश के कई शहरों में कविशाला मीटअप का आयोजन भी किया. अभी तक मुंबई, जयपुर, उदयपुर, दिल्ली, गुणगाओं, नॉएडा, लखनऊ सहित अन्य कई शहरों 200 से ज्यादा मीट अप कविशाला द्वारा किया गया है.

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