पत्रकार पर मुकदमा दर्ज करना सबसे आसान

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अनुज मिश्र
पुलिस- प्रशासन एवं मंत्रियों ,अधिकारियों ,समाजसेवियों आदि की खबरों को प्रकाशित करना पत्रकारों का दायित्व होता है और वह धर्म पत्रकार लोग बेहतर निभा रहे हैं। चाहे आंधी और तूफान,आग, पानी बरसे, गोली चल रही हो लेकिन पत्रकार अपने को पीछे नहीं ढकेलते जबकि गोली उनके भी लग सकती हैं क्योंकि उनमें एक ललक है समाज को सच्चा आईना दिखाना। पत्रकारों ने हमेशा समाज को आइना दिखाया जिसके कारण सरकारें बनती और बिगड़ती हैं ,जनमानस में जागरूकता आती है कि आखिर क्या सही है क्या गलत है लेकिन कभी किसी पत्रकार का कोई भी छोटा सा भी मामला पुलिस में पहुंच जाए तब उसके ऊपर ऐसे मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है। जैसे कि वह 307,302 का मुलजिम हो और पुलिस यह भी जांच पड़ताल नहीं करती है कि इस पत्रकार का पहले का बैकग्राउंड क्या है ?उसकी पहले की क्राइम हिस्ट्री क्या है ?और इस तरीके से पुलिस पत्रकार को मुलजिम बनाने का प्रयास कर देती है परंतु पत्रकार केवल एक एफआईआर से मुलजिम नहीं हो जाएगा क्योंकि यह डिसाइड कोर्ट करता है। सामान्य जनता जानती है कि अगर यही मामला किसी सरकारी कर्मचारी का है और सामने वाला व्यक्ति कितना भी पीड़ित क्यों न हो परंतु तब पुलिस कहती है कि मामले की पहले जांच कराएंगे और उसके बाद एफआईआर दर्ज करेंगे। नेता नेता के खिलाफ पुलिस मुकदमा लिखने की कोशिश कम करती है क्योंकि उन्हें अच्छे तरीके से पता है कि पक्ष -विपक्ष के नेता सदन में तलब करेगें जहां पर सामूहिक माफी मांगनी पड़ती है व लिखित नामा भी देना पड़ता है। ताजा प्रकरण पीलीभीत का आप सभी लोगों को पता है। जिला अस्पताल में सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ कितने भ्र्ष्टाचार जनता,शासन, प्रशासन को दिखाती है परंतु पीड़ित के तहरीर देने पर भी मुकदमा नही होता और पुलिस आजकल करके मुद्दे को शांत करवा देती है। पत्रकार लोग सबका साथ देते हैं परंतु जब पत्रकारों पर मुकदमा कर दर्ज हो जाता तो कोई भी संगठन भी खड़ा नहीं होता है जबकि वही संगठन के पदाधिकारी एक बार नहीं दस बार फोन करके कहते हैं कि भाई साहब यह वाली खबर लगा दीजिएगा क्योंकि आज हम ने गरीबों में कंबल बांटा है।आज हमने इतना बड़ा काम कर दिया है? इसका भी सबसे बड़ा कारण हमारे चंद्र भाई जयचंद पत्रकार हैं जो नफरत की दीवार खड़ी कर देते हैं जिसके कारण अधिकारी ,पुलिस, मंत्री ,नेता, समाजसेवी ,डॉक्टर पत्रकारों को हीन भावना से देखते हैं अगर हम अपने में एकजुट हो जाएं तब हमें किसी की जरूरत नहीं है। पुलिस के द्वारा एफआईआर होना कोई बड़ी बात नहीं है इसलिए डरने की कोई बात नहीं है ।पत्रकारों को अपना सच्चा धर्म निभाना चाहिए क्योंकि बहुत सारे पत्रकारों को समय-समय पर शहीद होना पड़ा और जेल जाना पड़ा।

Anil Anup

Anil Anup

राज्य ब्यूरो प्रभारी पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर l

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