बीएचयू छात्राओं पर हुई क्रूरता ने खोली जुमले वाले सरकार की पोल: सरे-आम छेडते हैं लड़के, विरोध करने पर मारती है पुलिस।

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बनारस(उ0प्र0) बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की छात्राओं ने मनचलो द्वारा छेड़खानी के विषय कई बार, प्रवक्ता, डीन व् अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से मौखिक व् लिखित शिकायत कि लेकिन हर बार सम्बंधित अधिकारियों ने सारा दोष लड़कियों पर डालते हुए शाम को हॉस्टल गेट न जाने की हिदायत दे डाली। मामला तब बढ़ा जब हॉस्टल आ रही एक छात्रा को रास्ते में एक लड़के ने रोक कर छेड़खानी शुरू कर दी, और अपना हाथ लड़की के कुर्ते के अंदर डाल दिया, जब लड़की ने शोर मचाया तो अन्य लड़कियों के आने पर लड़का भाग गया। इस घटना से छात्राओं में गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने दोबारा प्रवक्ता से शिकायत की लेकिन इस बार भी दोष छत्राओं के ऊपर मढ़ दिया। आक्रोशित छात्राओं ने प्रदर्शन कर खुद की सुरक्षा के लिए मुहीम छेड़ दी।

छात्राओं को विश्वास था कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी जिन्होंने एंटी रोमियों स्क़वाड कि शुरुआत की थी वो इन वो इन छात्राओं की समस्या का हल जरूर निकालेंगे, या फिर प्रधानमंत्री मोदी जिनका वाराणसी संसदीय छेत्र है व् जिनका सपना है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, वो इन छात्राओं का दर्द जरूर समझेंगे।
लेकिन इन छात्राओं की उम्मीद पर कोई खरा नहीं उतरा, और देर रात भारी पुलिस बल ने इन छात्राओं पर लाठी चार्ज कर दिया।
इन छात्राओं पर हुए इस बर्बरता ने ये सिद्ध कर दिया की मुख्यमंत्री योगी के लिये लड़कियों से ज्यादा गाय की सुरक्षा जरुरी है। लाठी चार्ज से घायल हुई लड़कियों की वेदना ने यह सिद्ध कर दिया की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का सपना नहीं जुमला मात्र है।
लड़कियों पर आधीरात को पुरुष पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक लाठी चार्ज सरकारी तंत्र की नामपुष्कता को बयान करता है। ताज्जुब कि बात तो यह है कि महिला सुरक्षा के नाम पर हाय तौबा मचाने वाले चिलगोजे बिलो दुबके बैठे है। क्या यह महिला सुरक्षा पर सेंध नहीं? क्या पुरुष पुलिस द्वारा लड़कियों को पीटना संवैधानिक है? क्या अपने इज्जत की रक्षा के लिए आवाज उठाना गलत है? इन छात्राओं का दर्द प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को क्यों नहीं दिख रहा?

Bablesh Dwivedi

Bablesh Dwivedi

Managing Editor

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