अमित शाह के खिलाफ एनकाउंटर की सुनवाई कर रहे जस्टिस लोया की मौत या हत्या ?

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2014 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई जज बृजगोपाल लोया की मौत के 29 दिन बाद  आए जज एमबी गोसवी ने इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को मामले की सुनवाई  शुरू हुए बिना ही बरी कर दिया, जिसके ख़िलाफ़ सीबीआई ने आज तक किसी प्रकार की अपील नहीं की है.

जस्टिस लोया की मौत के तीन साल बाद उनके परिजनों ने उनकी मौत को संदिग्ध बताते हुए सवाल खड़े किये है.

ज्ञात हो की बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत गुजरात पुलिस के कई अधिकारीयों के नाम आये थे.

द कारवां पत्रिका (रिपोर्ट) के एक पत्रकारों से बात करते हुए जस्टिस लोया की मौत को उनके परिजनों ने संदिग्ध बताते हुए कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

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ज्ञात हो की जस्टिस लोया की मौत का कारण दिल का दौरा पड़ने की वजह से बताया गया था, लोया 1 दिसंबर 2014 को अपनी सहयोगी जज स्वप्ना जोशी की बेटी की शादी में नागपुर गए हुए थे.

द कारवां से बातचीत के दौरान लोया के परिजनों ने उनकी मौत पर कई सवाल उठाए.

, जैसे-

  • लोया की मौत का समय विवादित है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लोया की मौत का समय 1 दिसंबर 2014 को सुबह 6:15 बजे दर्ज है, जबकि परिजनों ने बताया कि उन्हें एक तारीख़ को सुबह 5 बजे फोन पर उनकी मृत्यु की सूचना दी गई थी.
  • बताया गया कि लोया कि मौत दिल के दौरे से हुई, जबकि परिजनों ने बताया कि उनके कपड़ो पर खून के धब्बे थे.
  • लोया के पिता के मुताबिक लोया के सिर पर चोट थी
  • जस्टिस लोया की मौत के कई दिन बाद उनका फ़ोन उनके परिजनो को लौटाया गया, जिसमे से डाटा हटाया गया था.
  • जानकारी दी गयी की रात में दिल का दौरा पड़ने के बाद नागपुर (रवि भवन ) में ठहरे लोया को ऑटो से अस्पताल ले जाया गया था, लोया की बहन ने सवाल उठाया कि जस्टिस लोया को ऑटो में हॉस्पिटल क्यों ले जाया गया ? क्या रवि भवन जैसे वी० आई० पी० प्लेस में में कोई गाड़ी नहीं थी?
  • रिपोर्ट के अनुसार लोया कि मौत नेचुरल थी, तो फिर पोस्टमार्टम की जरुरत क्यों पड़ी?
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक व्यक्ति के हस्ताक्षर है, जिसके नीचे उसे मृतक का चहेरा भाई (मराठी में ) दर्शाया गया है, लेकिन परिजनों ने बताया की परिवार में ऐसा कोई व्यक्ति है ही नहीं.
  • ईश्वर बहेटी नाम के आर एस एस कार्यकर्ता पर भी सवाल उठाया गया है. बहेटी मौत के बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाने की जानकारी परिजनों को दी, साथ ही लोया का फोन भी परिवार को इस कार्यकर्ता ने ही लौटाया था.
  • पोस्टमार्टम के बाद पंचनामे का न भरा जाना भी शन्देह की स्थिति पैदा करती है

 

अन्य शन्देह उत्पन्न करने वाले तथ्य

लोया की मौत के 29 दिन बाद आए जज एमबी गोसवी ने इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को मामले की सुनवाई शुरू किये बिना ही बरी कर दिया.

ये भी पढ़ें :-सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला: अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए जस्टिस लोया को मिला था 100 करोड़ का ऑफर

अमित शाह के बाद आज तक इस मामले में 11 अन्य आरोपी , जिनमें गुजरात पुलिस के आला अधिकारी भी हैं, को बरी किया जा चुका है.

चौकाने वाली बात है की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी इस केस की जाँच सँभालने वाली प्रमुख संस्था सीबीआई ने इस फैसले के ख़िलाफ़ कोई अपील नहीं की है.

सोहराबुद्दीन मामले की सीबीआई जाँच के आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था की, इस मामले की सुनवाई गुजरात से बाहर हो, तथा एक ही जज इस जांच को शुरू से अंत तक देखे.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अनदेखा करते हुए मामले की जांच की शुरुआत जज जेटी उत्पत ने की, बाद में अचानक वे इससे हट गये.

6 जून 2014 को जज उत्पत ने मामले की सुनवाई में उपस्थित न होने को लेकर अमित शाह को फटकार लगायी, और अमित शाह को 26 जून को पेश होने का आदेश दिया, लेकिन अचानक ही 25 जून 2014 को उत्पत का तबादला पुणे सेशन कोर्ट में हो गया.

फिर इस मामले को जस्टिस बृजगोपाल लोया को सौंपा गया , लोया ने भी अमित शाह के उपस्थित न होने पर सवाल उठाये. जस्टिस लोया ने सुनवाई की तारीख 15 दिसम्बर 2014 तय की, लेकिन 1 दिसम्बर 2014 को ही उनकी मौत हो गयी.

जस्टिस लोया की मौत के बाद सीबीआई स्पेशल कोर्ट में यह मामला जज एमबी गोसवी को सौंपा गया
जिन्होंने दिसम्बर 2014 के आखिर में अमित शाह को इस मामले से बरी करते हुए कहा कि उन्हें अमित शाह के ख़िलाफ़ कोई साक्ष्य या सबूत नहीं मिला.

द कारवां में प्रकाशित रिपोर्ट में जस्टिस लोया की बहनो और पिता के बयान शामिल हैं, कारवां के रिपोर्ट के अनुसार लोया की पत्नी (शर्मीला ) और बेटे (अनुज) ने जान का खतरा होने की वजह से रिपोर्टर से बात नहीं की .

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