बिहार में सामाजिक परिवर्तन

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अनिल अनूप 

बिहार में स्कूली बच्चियां सामाजिक परिवर्तन की ‘राजदूत’ के तौर पर उभर रही हैं। गत एक वर्ष में कम से कम 175 स्कूली बच्चियों ने यह कहते हुए अपने विवाह बीच में ही रुकवा दिए कि वे दुल्हन के तौर पर किसी को सौंपे जाने से पहले अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हैं।

जहां कुछ ने इसका जिम्मा खुद उठाया और पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों के पास दौड़ कर पहुंचीं तथा अपनी शादी रुकवाने के लिए उनसे सहायता मांगी, अन्य ने अधिकारियों को भावनात्मक संदेश लिख कर प्रेषित किए। कुछ मामलों में बच्चियों के स्कूली संगी-साथी उनके बचाव में आगे आए। एक ताजा घटना में कुछ दिन पहले 9वीं कक्षा की छात्रा हंसिका कुमारी भाग कर पटना में एक पुलिस स्टेशन पहुंची और अपनी शादी रुकवाने के लिए मदद हेतु पुलिस के पास लिखित शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने भी उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए शिकायत पर तेजी से कार्रवाई की और उसकी शादी रुकवा दी।

पटना जिला के बिहता ब्लाक में श्रीरामपुर गांव के मनोज राठौर की बेटी हंसिका की शादी 20 जुलाई को होनी तय हुई थी। विवाह पूर्व रस्मों में भाग लेने के लिए उसके ससुराल वाले भी दो दिन पहले लड़की के घर पहुंच गए थे मगर वह चाहती थी कि उसकी शादी कुछ समय के लिए टाल दी जाए और इस मामले में उसने अन्य को भी मनाने का प्रयास किया मगर उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। जब कोई विकल्प नहीं बचा तो लड़की ने एक आटो पकड़ा तथा स्थानीय बिहता पुलिस स्टेशन पहुंची और पुलिस वालों को अपनी दुखभरी कहानी सुनाई। परिणामस्वरूप स्थानीय स्टेशन हाऊस आफिसर (एस.एच.ओ.) रंजीत कुमार सिंह लड़की के घर पहुंचे और उसके अभिभावकों से शादी टालने को कहा। यहां तक कि उन्होंने उसके अभिभावकों से अनुबंध पर भी हस्ताक्षर करवाए जिसमें उन्होंने सहमति जताई कि वे बेटी की शादी उसके वयस्क होने के बाद ही करेंगे।

हंसिका ने बताया कि उसकी पहली प्राथमिकता पढ़ाई है और वह शादी के बंधन में बंधने से पूर्व कुछ हासिल करना चाहती है। उसके अनुसार वह स्कूलों में चलाए जा रहे ‘पहले पढ़ाई फिर विदाई’ अभियान से प्रेरित हुई। उसके इस कार्य को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ उस जैसी सोच रखने वाले ग्रामीणों से काफी प्रशंसा मिली। यद्यपि वह अकेली नहीं है। इस वर्ष जून में गया जिला के गुरुआ ब्लाक की 8वीं कक्षा की छात्रा सिमरन कुमारी भी अपनी शादी टलवाने में सफल रही मगर इस मामले में उसकी कक्षा के सहपाठियों ने वास्तव में कड़ी मेहनत की।

सिमरन की शादी उत्तर प्रदेश के एक लड़के से तय हुई थी। सूचना मिलने पर स्कूली छात्राएं तेजी से मंदिर पहुंचीं और शादी रुकवा दी। लड़कियों के गुस्से को देखते हुए सिमरन के माता-पिता वहां से भाग गए। लड़कियों ने बाल विवाह के मद्देनजर स्थानीय बी.डी.ओ. बलवंत कुमार पांडे को भी बुलाया और शादी रुकवाने के लिए उन्हें भी दखल देने को कहा। हालांकि अजीब मामला गया जिला की ही 11वीं कक्षा की छात्रा रेशम कुमारी का था, जिसने स्थानीय जिला मैजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार सिंह को भावनात्मक पत्र लिख कर उनसे शादी रुकवाने के लिए मदद मांगी। उसने पत्र सामान्य डाक से भेजा था, फिर भी उसने चमत्कार कर दिखाया। पत्र मिलते ही डी.एम. उसके गांव पहुंचे और उसके अभिभावकों को तुरंत शादी रोकने का आदेश दिया।

गया की एक ऐसी ही अन्य घटना में 9वीं कक्षा की छात्रा पिंकी कुमारी अपनी दर्जनों सहपाठिनों के साथ स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंची और अपनी शादी रुकवाने में सफल रही। प्रसिद्ध समाज विज्ञानी सचिन्द्र नारायण का कहना है कि सरकार नन्ही स्कूली बच्चियों के स्तर पर कुछ करने में असफल रही है। यह वास्तव में अद्भुत है, जो यह संकेत देता है कि बाल विवाह के विरुद्ध सामाजिक जागरूकता बढ़ रही है।

Anil Anup

Anil Anup

राज्य ब्यूरो प्रभारी पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर l

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