मोदी के कैशलेस इंडिया का काला सच, हर रोज लग रहा लाखों का चूना

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प्रेम कुमार :- चार लोग मारुती में आये थे, उन्होंने कहा कि वो लोग लखनऊ से आये हैं शौचालय और आवास कि जाँच कर रहें है, उनलोगों ने हमसे आधार कार्ड माँगा फिर मशीन में अंगूठा रखवाया और चले गए, बाद में हमें पता चला कि हमारे बैंक खाते से 8800 रु० निकल गए” ये कहते हुए 55 वर्षीय राजरानी रुआंसी हो गयी.

मामला बुंदेलखंड के हमीरपुर मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में बसे ग्राम पंचायत टेढ़ा के ईसूली गाँव का है जहाँ 20 नवम्बर को एक अल्टो कार में चार लोग पहुंचे. वहां पहुंचते ही उन लोगों ने ग्रामीण को इकठ्ठा किया और बताया कि “वो लोग लखनऊ से आएं है और गांव में शौचालय और आवास योजना का सर्वे करेंगे. उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि शौचालय व् आवास योजना का लाभ लेने लिए आधार कार्ड चाहिए और सबको अपना अंगूठा भी मशीन में रखना होगा .” आवास व् शौचालय का नाम सुनकर ग्रामीण लालच में आ गये. ग्रामीणों ने एक एक कर अपना आधार कार्ड दिया व् मशीन में अंगूठा भी रखा.

इसके बाद वो लोग गांव से चले गए. अगली सुबह जब एक ग्रामीण बैंक गया तो उसे पता चला कि उसके खाते से पैसे निकल गएँ है. उसने आकर ये बात गांव में बताई तो सभी ग्रामीण बैंक गए और अपना खाता चेक किया जिसमे राजरानी के खाते से 8800 , इंदु कुमारी के खाते से 10000 , किशन देवी के खाते से 10000 , शिव शखी के खाते से 6000 , अवधेश यादव के खाते से 2600 रु० व् अन्य कुल 14 लोगों के खाते से लगभग 3 लाख रुपये निकाल लिए गए.

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इस घटना के बाद ग्रामीणों ने आनन फानन में बैंक सहित थाने में भी शिकायत की. लेकिन इससे पहले कि पुलिस कुछ समझ पाती. हमीरपुर मुख्यालय के ही पत्योरा ग्राम सभा के शिवरामपुर डेरा गांव में भी 23 नवम्बर को कुछ लोग बोलेरो में सवार होकर आये और आवास व शौचालय के सर्वे कि बात करके ग्रामीणों से आधार कार्ड लिए और मशीन में अंगूठा लगवाया. जिसमे कुंती के खाते से 4500 ,चंदा के खाते से 2300, विज्जु के खाते से 1000 अन्य लोगों के खाते से लगभग 90000 रु० निकाल लिए गए.

पुलिस व् बैंक को नहीं है कोई जानकारी : स्थानीय थाना सुमेरपुर पुलिस को नहीं पता कि पैसे कैसे निकाले गए. वहीँ जब न्यूज मिरर ने इलाहबाद यूपी ग्रामीण बैंक के मैनेजर सी एस गुप्ता से इस साइबर फ्रॉड के बारे में पूंछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें भी जानकारी नहीं कि ये पैसे कैसे निकाल लिए गए.

कैसे निकाले गए पैसे :-न्यूज मिरर कि पड़ताल में पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गए डिजिटल इंडिया के अंतर्गत कैशलेस इंडिया कि एक सेवा ए०ई०पी०एस० का उपयोग कर साइबर ठगों ने ग्रामीणों के खाते से पैसे निकाले है. ए०ई०पी०एस० यानि आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम डिजिटल इंडिया के अंतर्गत आने वाली कैशलेस इण्डिया कि सेवा है. जिसमे जिन खाता धारकों ने बैंक में अपना आधार कार्ड लिंक करा रखा है वो खाताधारक सिर्फ आधार नंबर और बायो मैट्रिक(फिंगर प्रिंट स्कैनर) फिंगर स्कैन कर पैसे निकाल सकता है.पैसे निकालने के लिए ए०ई०पी०एस० में बैंक पास बुक या खाता संख्या कि भी जरुरत नहीं पड़ती है.

वो तो अच्छा हुआ कि ए०ई०पी०एस० के माध्यम एक दिन में एक खाते से मात्र 10000 रु० ही निकाले जा सकते हैं . अगर ए०ई०पी०एस० कि कॅश विड्राल लिमिट अनलिमिटेड होती तो साइबर ठग ग्रामीणों के खाते से पूरा पैसा साफ कर देते.

प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान की भी खुली पोल :- डिजिटल इंडिया के अंग सी० एस० सी० (कॉमन सर्विस सेण्टर) के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रामीण स्तर पर डिजिटल साक्षरता हेतु पी०एम्०जी०दिशा नामक योजना शुरू की थी जिसमे ग्रामीणों को कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट व ऑनलाइन पेमेंट सम्बन्धी प्रशिक्षण दिया जाता है. पी०एम्०जी०दिशा में ए०ई०पी०एस० के बारे में भी बताया जाता है.

लेकिन जब न्यूज मिरर ने इस सम्बन्ध में टेढ़ा गांव के पी०एम्०जी०दिशा सेण्टर संचालक से बात की गयी तो उन्होंने बताया की उनके सेण्टर में अभी तक कुल 173 छात्र पंजीकृत हैं जिनमे 80 छात्रों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है और 46 छात्र सर्टिफाइड हो चुकें हैं. जब उनसे पूंछा गया कि उन्होंने ईसूली गांव में ट्रेनिंग दी या नहीं तो उन्होंने बताया कि डिस्ट्रिक्ट मैनेजर कि तानाशाही के चलते वो सही ढंग से सेंटर संचालित नहीं कर पा रहे है.

“एक छात्र के सर्टिफाइड होने के बाद उन्हें 297रु० मिलते है. जिसमे डिस्ट्रिक्ट मैनेजर 100 रु० कि घूस कि मांग करता है. इसलिए टेढ़ा में उन्होंने पी०एम्०जी०दिशा का काम बंद कर रखा है.

टेढ़ा ग्रांव के अलावा पत्योरा ग्राम सभा में भी पी०एम्०जी०दिशा कि स्थिति बदतर है पत्योरा ग्राम सभा में दो पी०एम्०जी०दिशा सेण्टर हैं जिनमे एक में पांच छात्र पंजीकृत है व् शून्य सर्टिफाइड. वहीँ दूसरे सेंटर में 23 छात्र पंजीकृत हैं व 12 सर्टिफाइड.
इस सन्दर्भ में न्यूज मिरर ने पत्योरा ग्राम प्रधान से बात कि तो उन्होंने बताया कि पी०एम्०जी०दिशा के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं. इसके बाद जनपद हमीरपुर के मौदहा तहसील के छिरका गांव के प्रधान से पी०एम्०जी०दिशा के बारे में पूंछा गया तो उन्होंने भी कहा कि सरकार कि इस योजना के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

सोंचने वाली बात है कि जब पी०एम्०जी०दिशा जैसी महत्वपूर्ण योजना के जिला प्रबंधक ही पी०एम्०जी०दिशा सेंटर संचालकों से 100 रु० घूस कि मांग करेगें तो ऐसे में वहां के ग्रामीण कितने डिजिटल साक्षर होंगे. साथ ही ग्राम प्रधानों को भी पी०एम्०जी०दिशा के बारे में जानकारी न होना भी डिजिटल अवेयरनेस कि पोल खोलता है.

डिजिटल इंडिया ग्रामीणों के लिए वरदान नहीं बल्कि जबरदस्ती थोपा गया “अभिशाप” है: भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र को लगता हो कि डिजिटल इंडिया देश के लिए वरदान है लेकिन असलियत यह है कि डिजिटल इंडिया देश के लिए अभिशाप है. डिजिटल इंडिया के पहले भी लेन देन ऑनलाइन होता था लेकिन तब ग्राहक कि इच्छा पर निर्भर करता था कि वह इंटरनेट/मोबाइल बैंकिंग या डेबिट कार्ड लेना चाहता है या नहीं. लेकिन मोदी सरकार ने जनता कि इच्छा को नजर अंदाज करते हुए जबरदस्ती डिजिटल इंडिया के नाम पर ए०ई०पी०एस० जैसी लेन देन प्रक्रिया जनता पर जबरदस्ती थोप दिया. अन्य सरकारों कि तरह ही मोदी सरकार भी अगर ए०ई०पी०एस० जैसी लेन देन प्रक्रिया को जनता कि इच्छा के अनुसार रखती तो आज ए०ई०पी०एस० के माध्यम से डिजिटल ठगी न हो रही होती.
उपरोक्त दोनों गांवों में हुई साइबर ठगी कि तो जानकारी सबको हो गयी लेकिन संभव है कि रोज इसी तरह साइबर ठगी करके जनता को लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा हो.

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