बसपा और जोगी कांग्रेस के गठबंधन पर धीरेंद्र गिरी की रिपोर्ट

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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले मायावती का जोगी से हाथ मिलाना एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है। असल मे बसपा से मित्रता की शुरुआत तब ही हो गई थी जब जोगी ने पार्टी बनाई और नीले के तर्ज पर गुलाबी को अपनाया। दोस्ती तो पहले ही हो चुकी थी ,बस सब कुछ समय आने पर घोषित हुआ,औऱ इस दौरान मायावती भी जोगी की जमीनी पकड़ को टोटलती रही। जब अजीत जोगी ने पार्टी बनाई तो कई दफा अपने बयानों में कहा मायावती,मुलायम से सम्पर्क में है। लेकिन विरोधियों द्वारा उनके बयानों को हल्के में लिया गया, नासूर बन चुका जाति का मसला जब प्रमाण पत्र रद्द होने तक जा पहुचा तो उनकी पार्टी से जुड़े कई मौकापरस्तों ने जोगी का साथ छोड़ दिया। हालांकि वह लड़ते रहे और हाईपावर कमेटी के गठन में तकनीकी खामियों को कोर्ट के समक्ष रखकर अस्थायी राहत पाई।

जोगी तन से नही लेकिन मन से बेहद मज़बूत है यही वजह है वह जीवटता के साथ न थकने की योग्यता विकसित कर चुके है। जब रायपुर से राजनादगांव तक उन्होंने रैली की तब उन्हें 102 डिग्री बुखार था,ऊपर से खराब मौसम लेकिन उन्होंने इसे निभाया।वह लगातार दौरे करते रहे और सेहत ज्यादा बिगड़ जाने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। जब जोगी अस्पताल में थे तब मायावती उनसे मिलने गई थी।

जोगी जब स्वस्थ होकर लौटे तो अपने 72वे जन्मदिन को मिशन साथ दो का नाम देकर रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया,जिसपर छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे कई दलों की नज़र थी। यही तो जोगी चाहते भी थे।

बीते दिनों जोगी ने जांजगीर चाम्पा जिले को काशीराम के नामपर करने की मांग करते हुए दोबारा बसपा से हो चुकी दोस्ती का संकेत दिया। उसके बाद बाबा भीमराव अंबेडकर के प्रपौत्र का उनके निवास में आकर लम्बी गुफ्तगू करना दूसरा संकेत था। आखिरकार रायपुर में बड़ी संख्या में युवा समर्थकों की भीड़ दर्शाते एक बड़ा युवा सम्मेलन आयोजित करके दिल्ली रवाना हो गए और बसपा के साथ गठबन्धन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।

मायावती का साथ मिलने से निश्चित ही वह तीसरी शक्ति के तौर पर अपनी मौजूदगी को पुख्ता कर चुके है। नीला और गुलाबी रंग आसानी से भीड़ में अलग नज़र आता है। कांग्रेस बसपा का गठबन्धन सम्भव था लेकिन कांग्रेस बसपा के लिए 5 से अधिक सीट छोड़ने के लिए तैयार नही थी,लिहाजा मायवती ने जोगी का साथ देने का फैसला किया।

बसपा कैडर से जुड़े अम्बेडकर के अनुयायियों को साध कर एक बड़ा वर्ग उनके साथ जुड़ चुका है। आगे और भी तीर है जोगी के तरकश में बस थोड़ा इंतज़ार करना होगा। @धीरेंद्र

Prakash Punj Pandey

Prakash Punj Pandey

State Bureau Chhattisgarh

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