कठुआ गैंग रेप :जाँच कर्ता पुलिस अधिकारी ने भी किया 8 साल कि मासूम बच्ची का बलात्कार

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तथ्य:संतोष प्यासा
स्टोरी: काज़ी अज़मत

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8 साल की आसिफा. 6 दिन तक भूख और दर्द से तड़पती रही. लेकिन उन हैवानो को दया नहीं आयी. नशीली दवाओं से अचेत पड़ी आसिफा के बदन को वो दरिंदे नोचते रहे. हैवानियत का ये खेल यही ख़त्म नहीं हुआ. जब आसिफा आखिर सांसे गिन रही थी तो पुलिस के “उस हैवान जाँच अधिकारी” ने कहा रुको इसे अभी मत मारना, मुझे भी इसके साथ बलात्कार करना है. उस पुलिस वाले ने भी आसिफा को अपनी हवस हवस तले कुचला. फिर दुपट्टे से गला घोंटा, उसके बाद सिर पर पत्थर से कई वार किया. इंसानियत को शर्मसार करने वाली ये घटना एक देव स्थान पर हुई.

मामला जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के रसना गांव का है. क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस पूरे घटना क्रम का मास्टरमाइंड रिटायर्ड राजस्व अधिकारी सान्जी राम है, जो उसी मंदिर का केयर टेकर है. इस घटना में सान्जी राम का बेटा विशाल और नाबालिग भतीजा भी शामिल है. अन्य आरोपियों में एसपीओ दीपक खजुरिया, सुरिंदर कुमार, प्रवेश कुमार, असिस्टेंट सब इन्स्पेक्टर आनंद दत्ता और हेड कांस्टेबल तिलक राज हैं. आनंद दत्ता और तिलक राज को सबूतों को नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

चार्जशीट के अनुसार इसमें कठुआ स्थित रासना गांव में देवीस्थान, मंदिर के केयर टेकर सान्जी राम को अपहरण, बलात्कार और हत्या का मास्टरमाइंड बताया गया है. सांझी राम के साथ विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, परवेश कुमार उर्फ मन्नू, सान्जी राम का नाबालिग भतीजा और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा कथित रूप से शामिल हुए. आरोप पत्र के अनुसार जांच अधिकारी (आईओ) हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्त भी नामजद हैं जिन्होंने राम से कथित तौर पर चार लाख रुपया लेकर अहम सबूत मिटाये. आठों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं.

kathua gang rape
आसिफा के कपड़ों के साथ उसकी माँ

आसिफा एक मुस्लिम समुदाय बकरवाल से सम्बन्ध रखती थी. बकरवाल समुदाय कठुआ में अल्प संख्यक है. बकरवाल परिवार का कठुआ में रहने वाले अन्य परिवारों से अवैध स्लॉटर हाउस चलाने और फसलों को बर्बाद करने को काफी समय से विवाद चल रहा है.

जाँच अधिकारीयों के अनुसार आसिफ़ा 10 जनवरी को जंगल में घोड़े चराने गयी थी जहाँ आरोपियों ने घोड़े ढूंढने में मदद करने के बहाने आसिफा का अपहरण कर लिया.
आसिफा के पिता मोहम्मद यूसुफ ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई. मोहम्मद युसूफ कि शिकायत पर पुलिस ने केस नंबर 10/2018 के तहत आईपीसी की धारा 363 के तहत केस दर्ज कर लिया.

आरोप पत्र के अनुसार कुछ हिंदू लोगों ने बकरवाल समुदाय को कठुवा से भगाने के लिए इस हैवानियत को अंजाम दिया .इस हैवानियत भरी दास्तां को मूर्त रूप देने वाला मास्टरमाइंड रिटायर्ड राजस्व अधिकारी सांजी राम था. उसने आसिफा के किडनैपिंग , रेप और हत्या की साजिश रची , ताकि इस घटना के बाद बकरवाल समुदाय दहशत में आकर कठुआ छोड़कर कहीं और चला जाए.

अपनी योजना को पूरी करने के लिए सांजी राम ने अपने नाबालिग भतीजे को अपने साथ मिलाया. इसके अलावा सांजी राम ने स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया को भी अपनी प्लानिंग में शामिल किया. 10 जनवरी की शाम को दीपक खजूरिया अपने दोस्त और स्पेशल पुलिस ऑफिसर विक्रम को साथ लेकर बिटू मेडिकल स्टोर गया. वहां से उसने इपिट्रिल की 10 गोलियां खरीदीं. इपिट्रिल दवा का इस्तेमाल बेहोश करने के लिए किया जाता है. इसी दरमियान सांजी राम के भतीजे को आसिफा जंगलों में दिखी .
आसिफा जब जंगल में अपने जानवरों को खोज रही थी, तो राम के भतीजे ने आसिफा से कहा कि उसके जानवर जंगल के अंदर है. लड़के की बातें सुनकर आसिफा उसके साथ जंगल में चली गई, जहां उसने लड़की की गर्दन पकड़कर उसे जमीन पर गिरा दिया. फिर पीट पीट कर आसिफा को बेहोश कर दिया. उस उसका दोस्त मन्नू भी उसके साथ था.

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बच्ची के शव को रखकर न्याय कि गुहार लगाते उसके पिता

आसिफा के बेहोश होने के बाद दोनों लड़को ने उसके साथ बलात्कार किया. फिर आसिफा उठाकर मंदिर ले आये और उसे मंदिर के एक कमरे में बंद कर दिया.
लड़की जब बेहोश हो गई, तो दोनों ने उसके साथ रेप किया. दूसरे दिन यानी 11 जनवरी को नाबालिग आरोपी ने मेरठ में अपने चचेरे भाई विशाल (आकांक्षा कॉलेज मीरापुर में बीएससी का छात्र था) को फ़ोन कर आसिफा के बारे में बताया.
12 जनवरी को विशाल सुबह छह बजे रसाना पहुंचा. फिर सुबह करीब 8.30 बजे वो अपने भाई के साथ देवस्थान पर पहुंचा. जहाँ आसिफा भूख और दर्द से कराह रही थी . उन्होंने आसिफा को नशे की तीन गोलियां दीं. वहीँ दूसरी ओर हीरानगर पुलिस स्टेशन की एक पुलिस टीम आसिफा कि खोज में लग जाती है. जिसमे खजुरिया भी शामिल रहता है. इसी बीच खजुरिया एक अन्य पुलिस अफसर इफ्तिखार वानी के साथ के साथ सांजी राम के घर पहुँच कर मासूम आसिफा को समय पर नशीली दवा देने के लिए कहता है. आरोप पत्र के अनुसार , सर्च टीम में शामिल हेड कांस्टेबल राज सांजी राम से घूस की मांग करता है. 12 जनवरी को ही सांजी राम उसे 1.5 लाख रुपए नाबालिग की मां के हाथों दिला देता है.

जार्जशीट के मुताबिक 13 जनवरी को आरोपी विशाल, नाबालिग और सांजी राम देवस्थान फिर पहुंचते हैं. सांजी राम के कहने पर विशाल आसिफा का के साथ बलात्कार करता है. 15 जनवरी तक ये हैवान आसिफा के जिस्म को नोंचते है .फिर उसी दिन सान्जी राम ने कहा कि अब बच्ची की हत्या कर उसे ठिकाने लगाना होगा. और पीछे के रास्ते से निकल गया.

उस वक्त दीपक खजूरिया वहां मौजूद था. उसने कहा कि थोड़ा रुक जाओ, मुझे भी रेप करना है. इसके बाद दीपक खजूरिया ने भी आसिफा के साथ रेप किया . इसके बाद मारने से पहले और भी आरोपियों ने बच्ची के साथ गैंगरेप किया. गैंगरेप के बाद सभी ने मिलकर बच्ची का गला घोंट दिया और फिर सर पर पत्थर मारकर उसे मार दिया. इसके बाद उसे 15 जनवरी को शव निकालकर जंगल में फेंक दिया गया.

जब तक केस में स्थानीय पुलिस जाँच कर रही थी , तब तक सांजी राम पैसे देकर आरोपियों को बचाता रहा. लेकिन 22 जनवरी को केस क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया और मामला पुलिस से आगे निकल गया. इसके बाद 23 जनवरी को क्राइम ब्रांच के एएसपी नवीद पीरजादा के नेतृत्व में इस मामले की जांच शुरू हुई. और जब चार्जशीट दाखिल करने के बाद पता चला कि इस आठ साल की बच्ची से कितनी हैवानियत की गई है. आठ लोगों ने एक खास बकरवाल समुदाय को गांव से बाहर निकालने के लिए इस आठ साल की मासूम बच्ची को निशाना बनाया.
इस मामले में पीड़ित पक्ष की वकील दीपिका थुस्सु रजावत ने कहा कि “मामले को लेकर चार्चशीट दाखिल कर दी गयी है. पीड़ित पक्ष न्याय की मांग कर रहा है। कुछ वकीलों ने चार्जशीट को लेकर बवाल किया था, उनके खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया है. अभी भी कुछ वकील विरोध कर रहे हैं, लेकिन हम आरोपियों को सजा दिला कर ही रहेंगे.”

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