नए और अनसुने कवियों की पाठशाला – कविशाला

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भारत में कविता हमेशा से एक ऐसा माध्यम रहा है, जिसने समाज के लिए दर्पण का कार्य किया है ! कभी राजनीतिज्ञों को नींद से जगाया तो कभी क्रांतकारियों को नयी उत्तेजना दी, कभी प्यार करने वालो की भषा बानी तो कभी दो देशो के बात का माध्यम ! हर एक जगह पर कविता ने एक अनोखा काम किया है! मगर आज ये माध्यम कभी खो सा गया है ! अब ऐसे नामो या कविताओं के लिए हमें पीछे ही जाना पड़ता है, ऐसा नहीं है की आज कोई कविता लिखना नहीं चाहता या फिर कविता पाठ में आगे नहीं आना चाहता ! इस नई पीढ़ी में अच्छे कवि भी है और अच्छी कवितायें भी है बस कमी है तो संसाधनों की ! ऐसे संसाधनों की जिनके जरिये कवि प्रेरित हो अपनी कवितायें समाज के सामने रखने के लिए, कवि को मार्गदर्शन मिल सके कविता में सुधार के लिए, अच्छे कवि को सम्मान मिल सके उसकी अच्छी कविता के लिए ! इसी समस्या के समाधान को खोजने निकला है – कविशाला !
कविशाला नए और अनसुने कवियों के लिए एक ऐसा माध्यम है जो उनकी हर तरह से मदद करने की कोशिश करता है और उनकी अच्छी कविताओं को समाज के सामने रखने के सहायता करता है!
 
कविशाला: एक कवि ही कवि और समाज की व्यथाओं को समझ सकता है, ‘अंकुर मिश्रा’ एक ऐसा ही नाम है तकनीकी और व्यावसायिक दुनिया से जुड़े रहते हुए कविशाला शुरुआत करीब एक साल पहले की थी ! इंजीनियर होने की वजह उन्होंने इस समस्या समाधान ऑनलाइन निकलने का प्रयास किये और कविशाला डॉट इन नाम से वेबसाइट की शुरूाआत की जिसमे एक कवि आकर अपनी रचनाये ऑनलाइन साझा कर सकता है ! महज एक साल से के समय में कविशाला ने कवियों के लिए एक अद्भुत प्लेटफार्म तैयार कर दिया ! आज कविशाला में 3500 से ज्यादा कवि अपनी कवितायें साझा करते है, करीब 35000 कवितायें (नए और युवा कवियों की) वेबसाइट पर उपलब्ध है ! कविशाला आज एक ऐसा माध्यम बन गया है जहां पर कवि अपनी कविताओं के साथ साथ साहित्य और कविता की विधाओं में चर्चा करते है ! जमीनी स्तर पर हर महीने दिल्ली, जयपुर, उदयपुर, मुंबई, सूरत, रायपुर, गुड़गाव और लखनऊ में वर्कशॉप और मीटअप का आयोजन होता है जहां कवि आकर अपनी कवितायेँ कवियों और कविता प्रेमियों के बीच साझा करते है उनसे कविता में कमियाँ और खामियाँ के बारे में सीखते है ! कविशाला में रोजाना ऑनलाइन कविताओं को पढ़ने वालो की संख्या करीब 12000 है, जिससे यह प्रतीत होता है की लोगो में कविताओं की रूचि फिर से जाग रही है !
 
अंकुर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से सुमेरपुर गांव से ताल्लुक रखते हैं जो बुंदेलखंड में आता है। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले अंकुर का बचपन गाँव में बीता जहां बिजली की कोई व्यवस्था नहीं थी। शाम होते ही पढ़ने में दिक्कत होती। शुरुआती पढ़ाई भी प्राइमरी स्कूल में हुई जहां टीचर बेहद कठोर थे। वह बताते हैं कि उन्होंने पांचवी कक्षा में इंग्लिश पढ़ने को नसीब हुई थी। अंकुर मानते हैं कि हमारे स्कूल में पढ़ाई का स्तर काफी नीचे हो गया है। कक्षा आठ में उन्होंने यूनीक एजुकेशनल ग्रुप नाम से पहला स्टार्टअप शुरू किया। उन्होंने कई संस्थानों और स्वयंसेवकों से बोलकर वहां गणित और विज्ञान के लिए वीकली सेशन लेने की गुजारिश की। धीरे-धीरे अंकुर का ये स्टार्टअप इतना प्रसिद्ध हुआ कि 17 गाँवों के 100 स्कूलों तक इसकी पहुंच हो गई। ये सब कुछ अंकुर ने अपनी पॉकेट मनी से पॉसिबल किया।
इसके बाद अंकुर आगे की पढ़ाई के लिए नोएडा में रहने लगे और वहां बीटेक करना शुरू किया। अंकुर बताते हैं कि पहली बार कंप्यूटर से एनकाउंटर बीटेक में ही हुआ था। गुड़गांव में ही उन्होंने आईटी कंपनी फोरेंटेक शुरू की। साथ ही राइटिंग में इंट्रेस्ट की वजह से ‘लव इज़ स्टील फ़्लर्ट’ नाम की एक नॉवेल लिखी। इसके अलावा कविता संग्रह ‘क्षणिक कहानियों की विरासत’ और ‘नई किताब’ भी उन्होंने लिखी। जब राइटिंग का पेशा मुकम्मल हुआ तो उन्होंने कविशाला नाम से अपना एक और स्टार्टअप शुरू किया।
कुछ कवि, जिन्होंने अपनी पहली कविता कविशाला मीटअप में पढ़ी थी आज वो बड़े मंचो पर पहुंच चुके है ! कविशाला भी इन कवियो को लिटरेचर फेस्टिवल, बुक फेयर आदि में अलग मंच प्रदान करता रहता है जिससे कविता समाज के और लोगो तक पहुंचे और कवियों को उसकी कविता के लिए सराहना मिल सके !  साथ ही साथ कविशाला प्रयासरत है नयी सिनेमाकारों के साथ काम करने के लिए, जहाँ पर कविशाला के कवि फिल्मो के लिए कवितायेँ लिख सके! समस्या बड़ी है! काम अभी बहुत करना है, उस मंच पर जहाँ कुमार विश्वास, मुनव्वर राणा या रहत इन्दोरी खड़े होते है वहाँ पर हमारी पीढ़ी से कविताओं को प्रस्तुत करने वाला कोई नहीं है! उस रिक्त स्थान को भरना कविशाला का एक लक्ष्य है ! हम तकनीकी दुनिया में जी रहे है, अगर हमें अपने पुराने कवियों को पढ़ना होता है तो उनके लिए कई प्लेटफार्म मिल जाते है, मगर इस नयी पीढ़ी के लिए ऐसा कोई माध्यम नहीं था, कविशाला का एक लक्ष्य है नए कवियों की कविताओं को ऑनलाइन लाना जहाँ पर हम उन्हें कभी कही भी पढ़ सके ! नए कवियों को यह जानने की जरूरत है उनमे क्या कमिया है, जिन्हे सुधारकर वो एक अच्छी कविता बना सकते है !
कविशाला इसी कार्य हेतु हर महीने मीटअप और वर्कशॉप करता है ! अगर आप को कविताओं में रूचि है तो कविशाला से अच्छा माध्यम आपके लिए कुछ नहीं हो सकता !!
Ram Bhawan

Ram Bhawan

District Correspondent

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