दिल्ली के दिल में कविशाला की बैठक – हुई कविताओं की बौछार

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भारत में कविता हमेशा से एक ऐसा माध्यम रहा है, जिसने समाज के लिए दर्पण का कार्य किया है !

कभी राजनीतिज्ञों को नींद से जगाया तो कभी क्रांतकारियों को नयी उत्तेजना दी, कभी प्यार करने वालो की भषा बानी तो कभी दो देशो के बात का माध्यम ! हर एक जगह पर कविता ने एक अनोखा काम किया है!

मगर आज ये माध्यम कभी खो सा गया है ! अब ऐसे नामो या कविताओं के लिए हमें पीछे ही जाना पड़ता है, ऐसा नहीं है की आज कोई कविता लिखना नहीं चाहता या फिर कविता पाठ में आगे नहीं आना चाहता !

इस नई पीढ़ी में अच्छे कवि भी है और अच्छी कवितायें भी है बस कमी है तो संसाधनों की !

ऐसे संसाधनों की जिनके जरिये कवि प्रेरित हो अपनी कवितायें समाज के सामने रखने के लिए, कवि को मार्गदर्शन मिल सके कविता में सुधार के लिए, अच्छे कवि को सम्मान मिल सके उसकी अच्छी कविता के लिए !

इसी समस्या के समाधान को खोजने निकला है – कविशाला !
कविशाला नए और अनसुने कवियों के लिए एक ऐसा माध्यम है जो उनकी हर तरह से मदद करने की कोशिश करता है और उनकी अच्छी कविताओं को समाज के सामने रखने के सहायता करता है!

दिल्ली के दिल में कविशाला की बैठक – हुई कविताओं की बौछार
Ankur Mishra -Founder Kavishala
Ankur Mishra

कविशाला कविताओं को पसंद करने वलो के एक ऐसी संस्था है, जो कविताओं को और कवियों को उनकी पहचान दिलाने के लिए काम कर रही है!

कविशाला की शुरुआत अंकुर मिश्रा ने डेढ़ साल पहले की थी, जिसमे कविशाला डॉट इन नाम की वेबसाइट शुरू हुयी थी, इसमें सभी नए कवि अपनी कवितायें साझा कर सकते है,

डेढ़ साल के इस सफर में वेबसाइट पर करीब चार हजार कवि अपनी रचनाये साझा कर रहे है,

संख्या करीब बत्तीस हजार है और रोजाना वेबसाइट पर करीब बारह हजार लोग आते है जो ऑनलाइन कविताये पढ़ते है और सुझाव साझा करते है !

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यह बढ़ता हुआ नंबर यही दर्शाता है की देश में कविता प्रेमी कम नहीं है और न ही लोगो का रुझान कविता के प्रति काम हुआ है !लोग बड़े कवियो से ज्यादा युवा और नए कवियों की कविताये पसंद करते है, बस जरूरत है उन नये कवियों को एक प्लेटफार्म दिलाने की जहाँ से उनकी आवाज लोगो तक पहुंच सके ! देश में कॉमेडी और गानो का दौर बहुत हो गया ! आज देश की दशा देखते हुए ‘दुष्यंत कुमार’ जैसे कवि की जरूरत है जो समस्याओ को सरकार तक पंहुचा सके और वो आवाज ऐसी सरकार सुनने में बिवस हो जाये हो जाये ! “अंकुर मिश्रा

दिल्ली के दिल में कविशाला की बैठक – हुई कविताओं की बौछार

कविशाला उन्ही कविताओं को बाहर निकालने के लिए काम कर रहा है, नए कवियों के लिए हर महीने मीटअप की शुरुआत मार्च २०१७ में की थी, और पिछले नौ महीनो में देश के हर बड़े शहर में मीटअप का आयोजन हो चुका है, लखनऊ, दिल्ली, गुड़गाओं, जयपुर, उदयपुर, सूरत, मुंबई, रायपुर इत्यादि शहरो से कवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अच्छे नाम निकल कर आये !

अच्छे कवियों को आगे लेकर कैसे जाना है उसके लिए कई तरीको से प्रयास कर रहा है, बड़े मंचो पर कविता पाठ, फिल्मो में कविताओं को लेकर जाना, नये कवियों की कविताओं को पब्लिश कराना इत्यादि !

कविशाला मीटअप की इसी श्रृंखला में कविशाला दिल्ली के लोधी गार्डन में नौवें मीटअप का आयोजन किया गया,

जहाँ दिल्ली और आस पास से करीब 60 कवियों और कविता प्रेमियों ने भाग लिया!

कविता पाठ की शुरुआत देश की तात्कालिक मुद्दों – पर्यावरण प्रदूषण और नोट बंदी से हुयी ! कुछ कविताओं के अंश :

अनाथ पड़े हर शब्द को बन्धन सूत्र में जिसने डाला है
तेरे मेरे हर शब्द का प्रहरी, ये ही तो कविशाला है
– आशीष सक्सेना

आसमानी चाहते और बे-ईमानी इश्क़ की,
फिर कभी तुमको सुनाएँगे कहानी इश्क़ की ।

– कवि पुनीत

तिरा दुश्मन सा जो पूरा शहर लगता है
तू सच कहता है इसलिए जहर लगता है

~उमेश भरतपुरिया

उलझती हुई राहों में खुद को सुलझाने की रिवायत,
हर डूबते हुए आशिक़ के अधूरे इश्क़ की कहानी।

— रमा नयाल

आजकल बहुत ख़र्चे हैं बाज़ार में,
फिर वही पुराने चर्चे हैं बाज़ार में।
ज़रा थामना अपनी धड़कनों को,
फिर इश्क़ के पर्चे है बाज़ार में।

– योगेश राठौर

कविता अपनी बात रखने सबसे अच्छा माध्यम होती है, और कवि को हमेशा तैयार रहना चाहिये तात्कालिक समस्याओ पर लिखने के लिए!

कविशाला जल्द ही हर शहर में कुछ अच्छे कविओ साथ हर महीने निशुल्क वर्कशॉप कराने का प्लान कर रहा है! कविशाला वेबसाइट एक ऐसा माध्यम है जहाँ पर आप चौबीस घंटे युवा कवियों को पढ़ और सुन सकते हो!

(लिखते रहिये आदत बुरी नहीं है)

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