मीडिया से जुड़े व्यक्तियों को बेहतर नसीहत

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पत्रकार जो सबको न्याय दिलाने के लिये लिखता है व हर किसी के लिए लड़ता है लेकिन जब एक पत्रकार के ऊपर अन्याय होता है तब बातें आती हैं कि हम पेपर वाले हैं, हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले हैं ,हम सोशल मीडिया वाले हैं और डिजिटल मीडिया वाले हैं यह बहुत ही गलत है। शासन और प्रशासन पत्रकारों के कभी भी हितकारी नहीं हो सकते उसका कारण है कि पत्रकार अच्छाई एवं बुराई दोनों दिखाने के लिए स्वतंत्र है अगर कोई व्यक्ति अच्छा कार्य करता है तब उसकी अच्छाई लिखी जाएगी और अगर कोई व्यक्ति बुरा करता है तब उसकी बुराई को प्रकाशित करना भी एक पत्रकार का कार्य होता है….

-अनुज मिश्र

एकता सबसे बड़ी ताकत होती है और यह बात सभी लोग भली-भांति समझते हैं उसके बावजूद भी आज पत्रकारिता का लगातार दमन हो रहा है लगभग प्रतिदिन अखबारों में, टीवी चैनलों के माध्यम से एवं सोशल मीडिया के माध्यम से खबरें आती हैं आज उस पत्रकार के गोली पड़ी, आज उस पत्रकार के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी गई, आज उस पत्रकारों को रोड पर सरेआम मारा गया परंतु कभी विश्लेषण किया है इसका मुख्य कारण क्या है? मेरे अनुसार सबसे बड़ा मुख्य कारण है कि आपस में एकता न होना। लगभग विभागों में देखा होगा कि एकता कैसे निभाई जाती है ?परन्तु पत्रकारिता विभाग छोड़कर अन्य विभागों से सीख लीजिए। कभी शिक्षा विभाग में देखा है अपने गलत साथी तक को बचाने के लिए जिलों में हड़ताल होती फिर राज्य स्तर पर हड़ताल होती और शासन-प्रशासन को झुकना पड़ जाता क्योंकि शिक्षकों पर बहुत सारे छात्र और छात्राओं का भविष्य टिका है। अलग अलग जनपदों के जिला अस्पतालों का नजारा प्रतिदिन देखते हो और डॉक्टरों की लापरवाही से कितने लोगों की मृत्यु हो जाती है परंतु डॉक्टर पर कार्यवाही नहीं होती बल्कि उसके खिलाफ जो आवाज उठाता है उसके खिलाफ उल्टी तहरीर दे दी जाती है कि इन्होंने सरकारी कामकाज में अड़ंगा लगाया जबकि पत्रकार दिखाता है सच्चाई लेकिन उसको मिलती है एफआईआर। सोशल मीडिया पर ज्यादा ख़बर वायरल होने लगती तब भी डॉक्टर कार्यवाही नहीं हो पाती है क्योंकि सारे डॉक्टर बैठ जाते हैं हड़ताल पर और अगर 10 दिन डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी तो देश में कितने लोग मरेंगे, इसका सरकार जवाब नहीं दे पाएगी ,इसलिए खानापूर्ति करके मुआवजा पीड़ित को दिलवाकर इतिश्री कर दी जाती है,इसे कहते हैं एकता।हालांकि सारे डॉक्टर एक जैसे नहीं होते हैं डॉक्टर भगवान का रूप माने जाते हैं परंतु ऐसा कलयुग में पूर्णतया सत्य नहीं है।

वकीलों की एकता सभी के लिए एक मिसाल है जबकि प्रतिदिन वकीलों को आमना सामना करना पड़ता है परंतु उन्हें अपना कर्तव्य और धर्म पता है कि जो उसका क्लाइंट है, उसके लिए केस लड़ते हैं न कि अपने लिए।तथ्यों के आधार पर लड़ते हैं नाकि व्यक्तिगत कोई भी वकील व्यक्तिगत नहीं मानता है उसे पता है जो पीड़ित है उसके तथ्यों व साक्ष्यों पर केस लड़ते हैं लेकिन अगर किसी एक वकील की लड़ाई हो तो सभी ने देखा है कि सारा एसोसिएशन एक साथ होता है और वकील भी अगर दस दिनों की हड़ताल कर दें तो समझ सकते हो कि देश की स्थिति क्या हो जाएगी जिसकी कल्पना भारत सरकार अच्छी तरीके से जानती है। व्यापारी संगठनों से एकता का पाठ पत्रकारों को सीखना चाहिए जब भी यह किसी व्यापारी का उत्पीड़न होता है तब शासन-प्रशासन के साथ के खिलाफ आवाज बुलंद करते हैं और एकजुट होकर मुहिम चलाते हैं, शासन प्रशासन को झुकना पड़ जाता है ,सरकारों को झुकना पड़ जाता है। एकता का पाठ छात्र संगठनों से सीखना चाहिए जब किसी एक छात्र पर गलत आरोप लगाता है एवं उस छात्र का भविष्य चौपट होने की कगार पर होता है।ऐसी दशा में सारे छात्र संगठन एकजुट हो जाते हैं और ईंट से ईंट बजाकर उस छात्र एक छात्रा को न्याय दिलाते हैं इसे कहते हैं सही मायने में एकता। परंतु पत्रकार जो सबको न्याय दिलाने के लिये लिखता है व हर किसी के लिए लड़ता है लेकिन जब एक पत्रकार के ऊपर अन्याय होता है तब बातें आती हैं कि हम पेपर वाले हैं, हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले हैं ,हम सोशल मीडिया वाले हैं और डिजिटल मीडिया वाले हैं यह बहुत ही गलत है।

शासन और प्रशासन पत्रकारों के कभी भी हितकारी नहीं हो सकते उसका कारण है कि पत्रकार अच्छाई एवं बुराई दोनों दिखाने के लिए स्वतंत्र है अगर कोई व्यक्ति अच्छा कार्य करता है तब उसकी अच्छाई लिखी जाएगी और अगर कोई व्यक्ति बुरा करता है तब उसकी बुराई को प्रकाशित करना भी एक पत्रकार का कार्य होता है। किसी भी पत्रकार के द्वारा अच्छाई की प्रशंसा कम होती है परंतु अगर गलत किया है उसको लिख दिया तब अधिकारी एवं नेता उसको नेगेटिव वे में लेता है बल्कि वह उस पत्रकार को दुश्मन मारने लगता है जबकि नेता एवं अधिकारी का दायित्व बनता है कि जो लिखा है अगर गलत लग रहा है तो सुधार करिए ताकि ऐसा मौका ना मिले लेकिन ऐसा देखा नहीं जाता है।

Anil Anup

Anil Anup

राज्य ब्यूरो प्रभारी पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर l

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