कौन है Pooja Sachdeva जिसने अपनी कविता “मै कैरेक्टरलेस हूँ” के जरिये यूट्यूब और सोशल मीडिया में धमाल मचा रखा है ?

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Pooja Sachdeva इन दिनों सोशल मीडिया और यूट्यूब पर एक लड़की छाई हुई है, जिसकी वजह है उसकी कविता “मै कैरेक्टरलेस हूँ” . जिसने भी ये कविता सुनी उनसे अपने दाँतों तले ऊँगली दबा ली.
तथाकथित समाज के ठेकेदारों के तो सीने में सांप लोट गए. लेकिन इस ढीठ लड़की के आगे कोई कुछ बोल नहीं सका. अब आप भी सोंच रहे है होंगे की आखिर कौन है ये लड़की. तो हम आपको बता दे की इस लड़की का नाम है पूजा सचदेवा. पूजा सचदेवा से हमने बात की जिसे हम आपके साथ साझा कर रहे है.
पहले आप खुद सुनलें पूजा सचदेवा की धमाल मचाने वाली कविता-

पूजा जी सबसे पहले न्यूज मिरर कि तरफ से मैं आपको बधाई देना चाहूंगा कि आपने दकियानूसी सोंच को अपनी कविता “हाँ मैं कैरेक्टरलेस हूँ” के ज़रिये एक करारा तमाचा मारा है.
जैसा कि हमने अपने सर्वे में पाया कि आपकी कविता ने कई लड़कियों के अंदर हिम्मत जगाई जिससे कि उन्होंने अपने साथ हुए ज्यादती के खिलाफ न सिर्फ आवाज उठाई बल्कि दोषियों के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट भी की.
आज हम आपकी कविता को लेकर आपसे बात करेंगें.

पाठक जानना चाहेंगे कि आखिर कौन है ये पूजा सचदेवा जिसने पुरुष प्रधान सोंच को पटखनी दी? क्या करती है पूजा ? 

मैं दिल्ली में पली बड़ी हूँ और मुंबई में काम करती हूँ| मैं कईं साल RJ रह चुकी हूँ, कईं ,शोज में अपनी आवाज़ दे चुकी हूँ, थिएटर आर्टिस्ट हूँ, आठ साल से भी ज्यादा मीडिया इंडस्ट्री में काम कर चुकी हूँ, राइटर हूँ. एक बड़ी कंपनी में मैनेजर होने के साथ साथ गीतकार बनने का सपना रखती हूँ. मैंने कईं गाने लिखे हैं जिन्हे म्यूजिक कम्पोज़र्स को दिखाना चाहूंगी. मैंने हाल ही में टीवी के लिए गीतकार के तौर पर एक प्रोजेक्ट खत्म किया है.

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मैंने पत्रकारिता और मीडिया में मास्टर्स किया है. खाली समय में मुझे लिखना, डांस करना, फिल्म्स देखना बहुत पसंद है. इसके साथ मेरी एक और कविता मुझे बेहद पसंद है जिससे सोशल मीडिया पर काफी प्यार मिला है – ‘आँखों आँखों वाला प्यार’. आज के समय में एक लड़की को कैसा प्यार चाहिए ये कविता उस पर बनाई गयी है.

पूजा जी “हाँ मैं कैरेक्टरलेस हूँ”, ये कविता आपके ज़हन में कैसे आयी? या वो क्या है जिसने आपको ये कविता लिखने के लिए प्रेरित किया ?

सबसे पहले मैं उन लाखों लोगों को शुक्रिया कहना चाहती हूँ जिन्होंने न सिर्फ इस वीडियो को देखा बल्कि इसे चालीस हज़ार से भी ज्यादा बार शेयर किया. इस कविता को लिखने की प्रेरणा मुझे खुद से और समाज से मिली है| मैं आठ साल मीडिया में काम कर चुकी हूँ इसीलिए मैंने ऐसे कईं हादसे देखे सुने हैं और उन पर खबर भी बनाई है जिससे सिर्फ सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते थे. मैंने अपनी निजी ज़िन्दगी में भी ऐसे अनगिनत घटनाओं को झेला है और वो गुस्सा ही मेरी प्रेरणा बनी. मेरे साथ ऐसे कईं हादसे हुए जहाँ मैं बाल बाल बची. पर ये तो इंडिया की लगभग हर लड़की की कहानी है. यहाँ औरत एक आम महिला नहीं बल्कि एक सरवायेवर है जो रोज ऐसे हादसों का सामना कर सही सलामत घर पहुँचती है.

एक वक़्त ऐसा भी था जब ऑफिस से घर जाते समय मैं चाक़ू अपने साथ लिए चलती थी क्यूंकि मेरे ऑफिस के पास जंगल था और बगल में बॉयज हॉस्टल जहाँ के लड़के हर रात बाहर आकर लड़कियों को छेड़ते थे. ये जयपुर की बात है. निर्भया जब फिल्म देखने उस रात बाहर निकली थी तब उससे अंदाजा भी नहीं था की उसके साथ इतना खौफनाक हादसा होने वाला है. जब एक लड़की घर से बाहर निकलती है तो उसे ये डर रहता है की क्या वो सही सलामत घर लौट पायेगी या नहीं. ये डर जब तक ख़त्म नहीं होता इस समस्या को गंभीरता से लेना होगा. इंटरनेट पर बैठ कर कमेंट कर देना या किसी को ट्रोल कर देना आसान है लेकिन उस एक पल में जब आप होते हो जब चार पांच लड़के आपको घेरे रहते हैं और आपको पता नहीं होता आपके साथ अगले पल क्या होने वाला है, आप ज़िंदा बच पाओगे या नहीं – वो झेलना आसान नहीं .जो लोग इससे बड़ी आसानी ने फेमिनिज्म की लड़ाई बोलकर नकार रहे हैं उन्हें ये समझना होगा . ये कविता सिर्फ उन लड़को के खिलाफ है जो लड़कियों को छेड़ते हैं. बाकि मर्दो के लिए मेरे दिल में बहुत इज्जत है. जो लड़कियों की इज्जत करतें हैं उन लड़को को मेरा हैट्स ऑफ.

इस कविता में एक जगह आपने ज़िक्र किया है, ये एक वास्तविक कहानी है? तो क्या डी यू फेस्ट से लौटते हुए आपही के साथ कुछ लड़कों ने छेड़खानी की थी ? अगर हाँ तो क्या आपने उन लड़को के खिलाफ कंप्लेंट की ? अगर हाँ तो उसपर क्या एक्शन हुआ ? और अगर नहीं, तो आपने कंप्लेंट क्यों नहीं की थी?

हाँ ये घटना सच्ची है. काफी लोगों ने ये सवाल किया की मैं इतनी छोटी होने के बावजूद डी यू के फेस्ट में क्या कर रही थी. दरअसल जिस मैदान पर ये फेस्ट हर साल होता है हमारा घर वहां से वाकिंग डिस्टेंस पर ही है. जैसे ही मुझे पता चला वहां बड़े स्टार्स आ रहे हैं तो मैं उत्साहित हो गयी, फिर मैं और मेरी बड़ी बहन वहां की ओर चल दिए. हम बचपन से वही पले बड़े हैं, वो अपना इलाका है तो हम अंदर गए, फेस्ट एन्जॉय किया और वापिस आते वक़्त वो हादसा हुआ. क्यूंकि सर्दी के दिन थे तो वो सड़क सुनसान थी. जैसे ही वो लड़के कार में भागे हमने पुलिस को ढूढ़ने की कोशिश की क्यूंकि फेस्ट की वजह से पुलिस वैन राउंड पर ही थी. वो मेरी ज़िन्दगी का पहला छेड़खानी वाला हादसा था इसीलिए उस वक़्त मैं बस भाग कर घर जाना चाहती थी. काफी आगे तक चलने पर भी जब पुलिस वैन नहीं मिली तो हम घर लौट गए.

 इस कविता को लेकर आपकी फैमिली क्या कहती है ? और इस कविता के लिए आपको सबसे ज्यादा सपोर्ट किसने किया (फॅमिली मेंबर या किसी दोस्त ने ?)

मुझे मेरी फॅमिली के साथ साथ दोस्तों से पूरा सपोर्ट मिला है. इनफैक्ट मेरी मम्मी ने भी इस वीडियो को अपने फेसबुक पर शेयर भी किया . कईं दोस्तों और कॉलेज के जूनियर्स ने मुझे मैसेज किया की उन्हें मुझ पर गर्व है. मैं खुशनसीब हूँ की मुझे ऐसा परिवार मिला है जो लड़के और लड़कियों में फर्क नहीं करता. मेरे घरवाले एजुकेटेड हैं और वो जानते हैं समाज में क्या हो रहा है. हाँ उन्होंने मुझे जरूर कहा की कविता में मुझे गाली नहीं देनी चाहिए थी, पर मैंने उन्हें समझाया की मैं अमूमन अपनी ज़िन्दगी में ऐसे शब्द इस्तेमाल नहीं करती पर ये सिर्फ उन लड़को के लिए अंदर से निकली जिन्होंने इतने बुरे काम किये हैं. अब जो लड़कियों के साथ रेप कर सकते हैं उन्हें गाली तो क्या जूते चप्पल भी कम है और कईं लोगों ने मुझे कमेंट सेक्शन में उपदेश दिए की गाली क्यों दी. हमारे देश में यही दिक्कत है. असल समस्या को छोड़ कर लोगों का ध्यान फालतू की चीज़ो पर जाता है. उस वीडियो में इतना महत्त्वपूर्ण शन्देश दिया गया है लेकिन कुछ लोगों ने सिर्फ गाली ही पकड़ी.अगर चाँद दिखाया जाए तो उंगली में गलतियां नहीं निकालनी चाहिए. अगर आपकी बहन के साथ कोई छेड़खानी करे तो क्या आप उसे मारे पीटेंगे नहीं, क्या आपके मुँह से गाली नहीं निकलेगी?

 फेमिनिज्म के बारे में आप क्या कहना चाहेंगी ? आजकल ज्यादातर देखा गया कि बहुत से लड़के और पुरुष फेमिनिज्म को मानसिक रोग मानते है, वहीँ इसके विपरीत फेमिनिज्म सप्पोर्टर्स पुरुष प्रधान सोंच को मानसिक बीमारी कहते हैं ? क्या फेमिनिज्म का मतलब पुरुषों से नफरत करना और उन्हें गाली देना है ? अगर नहीं तो फेमिनिज्म का सकारात्मक रूप क्या है ?

मैं साफ़ कर दूँ मैं पुरुषो की हद्द से ज्यादा इज्जत करती हूँ, और मैं फेमिनिस्ट नहीं हूँ . मैं उन औरतो में से हूँ जो लड़को के लिए दरवाज़ा खोलती है. यकीन मानिये मैंने ऐसा कई बार किया है. औरतो की सुरक्षा के बारे में बात करना फेमिनिज्म नहीं है. लोगों को फेमिनिज्म का सही मतलब नहीं पता. जहाँ औरत अपने बारे में बात करने लगती है उससे फेमिनिस्ट का तमगा दे दिया जाता है. फेमिनिस्ट वो होते हैं जो वीमेन इक्वलिटी को सपोर्ट करते हैं जबकि मैं मानती हूँ ये लड़ाई ही गलत है. औरत और मर्द बराबर नहीं बल्कि जिस तरह से औरत को बनाया गया है – उसका शरीर, जो जिम्मेदारियां वो उठा रही है, इस हिसाब से वो मर्दो से ऊपर ही है. उदहारण के तौर पर, एक औरत जब माँ बनती है तो उससे कुछ महीनो या एक साल की मैटरनिटी लीव मिलती है जबकि मर्दो के साथ ऐसा नहीं होता. वो भी ये कह सकते हैं की अगर आप मर्द और औरत को बराबर समझते हैं तो उन्हें ६ महीने की ज्यादा छुट्टियां क्यों? कुदरत ने आदमी और औरत को अलग तरीके से बनाया है – दोनों में बराबरी हो ही नहीं सकती. ऐसे ही दफ्तर में २१ छुट्टियां मिलती हैं जबकि मेरा मानना है की औरतो को ज्यादा छुट्टियां मिलनी चाहिए. हर महीने पीरियड्स के पहले दिन कईं लड़किया अत्यंत दर्द से गुज़रती हैं और उन्हें या तो ऐसे हालात में काम करना पड़ता है या उन २१ छुट्टियों का इस्तेमाल जबकि वही छुट्टियां मर्द घूमने के लिए कर सकते हैं. तो मैं वीमेन इक्वलिटी के सपोर्ट में नहीं. दुनिया में और अपने इंडिया में ही बेशक काफी अच्छे लड़के हैं, मुझे लड़को के अनगिनत मैसेज आये हैं की वो मेरी इस वीडियो को सपोर्ट करते हैं . सब लड़के बुरे नहीं बस कुछ हैं और मेरी वीडियो उन्ही कुछ के खिलाफ है.

“ठरकी लड़की पुरुष प्रधान सोंच के बारे में क्या कहना चाहेगी ? स्त्री-पुरुष अपने ईगो को कैसे कण्ट्रोल करें कि स्त्री -पुरुष कि वर्चस्वा कि लड़ाई न हो ?

लोग मुझे ठरकी लड़की के नाम से जानते हैं क्यूंकि वो मेरा पेन नाम है. और मुझे ख़ुशी है की ये नाम लोगों के ज़हन में घर कर गया है क्यूंकि यही मैं चाहती थी. इस नाम के पीछे की इक वजह है जो मैं वक़्त आने पर बताउंगी. हमें पहले ये समझना होगा की स्त्री और पुरुष दोनों का अपना अपना एहम स्थान है. दोनों का स्पेस अलग है. फिर एक दूसरे के खिलाफ लड़ाई क्यों? दोनों को एक दूसरे के अस्तित्व को महत्ता देनी होगी. सिर्फ कुछ लड़के बुरे होते हैं और ऐसे ही कुछ लड़कियां भी बुरी होती हैं जो निर्दोष लड़को को फसाती हैं. स्त्री और पुरुष को आपस में न लड़ कर सिर्फ उन कुछ वाले वर्ग को खत्म करना है.

पूजा सचदेवा को अब अगर कोई चैरेक्टरलेस कहता है तो वो कैसा या क्या फील करतीं हैं ?

सच कहूं तो आज तक मुझे किसी ने चरक्टेरलेस नहीं बुलाया और शायद आगे भी ऐसा नहीं हो. मैं जिस तरह के पढ़े लिखे लोगों से घिरी रहती हूँ, जिस तरह के वातावरण में पली बड़ी हूँ वो सब शिक्षित हैं और गंभीर मुद्दों पर अपनी सही राय रखते हैं. पर मेरी वीडियो जरूर समाज के उन लोगों पर चांटा है जो संस्कृति के नाम का झंडा लिए दूसरे को उपदेश देते हैं और जिन्होंने न जाने कितनी लड़कियों को उनके पहनावे पर या बिना उन्हें जाने चरक्टेरलेस कहा होगा.

आजके यंगस्टर्स को ठरकी लड़की (पूजा सचदेवा ) क्या मैसेज देना चाहेगी ? फीमेल्स को मोटीवेट करने करने के लिए फ्यूचर में आप क्या करेंगीं ? (कोई प्लान , या बस अपनी कविताओं के ज़रिये ही.)

आज के योंग्सटर्स को सिर्फ यही कहना चाहूंगी की अगर आप कुछ गलत होता देखें तो उसके खिलाफ बोले क्यूंकि वही पहला कदम है. मुझे इस वीडियो के बाद कितने मेसेजेस आये जिनमे ये लिखा गया की मेरी वीडियो के बाद उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत आयी, एक मेल भी आया जिसमे एक लड़की ने लिखा कैसे उसकी दोस्त के पिता ५ साल की उम्र से उसका रेप करते आ रहे हैं और वो बेहद डिस्टर्ब है. प्लीज अपने लिए खड़े हो तभी लोग आपने साथ आएंगे. आगे के लिए कविता के अलावा मैं मोटिवेशनल स्पीकर बनना चाउंगी क्यूंकि मुझे लगता है औरतो के उत्साहन की बेहद जरुरत है. उन्हें कोई चाहिए जो उनसे बात करे, उनकी समस्या के समझे.मुझे हर दिन कईं message आते हैं जो मुझसे राय मांगते हैं.
इसके साथ ही मैं पीरियड हाइजीन के क्षेत्र में कुछ कदम उठाने का विचार रखती हूँ. लेकिन जब तक इससे शुरू नहीं करती इसके बारे में कुछ कहना मुनासिब नहीं होगा.

पूजा सचदेवा उन सभी लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है, जो समाज के डर की वजह से अपने साथ हुई ज्यादती के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाती. न्यूज मिरर पूजा सचदेवा को उनकी हिम्मत के सलाम करता है. हम उम्मीद करते हैं की पूजा भविष्य में भी लड़कियों के अंदर हिम्मत भरती रहेंगी.
आप पूजा सचदेवा की अन्य कविताओं को उनके यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं. साथ ही उनके फेसबुक पेज को लाइक करके उनसे संपर्क कर सकतें है.

पूजा सचदेवा के यूट्यूब चैनल पर उनकी कवितायेँ सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें
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संकलनकर्ता : संतोष “प्यासा”
इंटरव्यू की रुपरेखा: क़ाज़ी अज़मत.

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