क्या मी टू के साथ बी टू पर भी चलेगा कैमपेन…

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सलीम रज़ा :- आजकल पूरे देश में मी टू का ही शोर मचा हुआ है सही में मी टू ऐसा दर्द है जिससे नारी समाज आहत दिखाई्र दे रही है वहीं इन महिलाओं के सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर कैम्पेन देखकर वो महिलाये सबसे ज्यादा दुःखी हैं जिन्होंने मी टू के दर्द को झेला नहीं है वल्कि भुक्त-भोगी महिलाओं के दर्द को महसूस किया है।लिहाजा वो भी इस कैम्पेन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं शायद ज्यादा जागरूक होने के कारण वो ये भी भूल बैठी कि सुबह शाम भूखे प्यासे दफतर में मी टू की का सामना कर रहे अपने अधिकारियों का कोपभाजन बनकर खुशी-खुशी उनके लिए दो वक्त की रोटी और अनचाही फरमाईशों की लम्बी लिस्ट पूरी करने वाला मंत्रोच्चारण के साथ सात फेरे लेकर जिन्दगी भर मरने जीने की कसमें खाने वाला एक अदद बेचारा बेसहारा उनका पति भी होगा। जो अकेला पड़ कर कभी भी किसी भी वक्त इस मीटू नाम के वायरस का शिकार हो जाये फिर क्या होगा। ऐसा तो है नहीं किे मीटू वायरस ने सिर्फ साधन सम्पन्न धनाढय लोगों के घर जाने का मन बनाया हो वरना वायरस तो ऐसा होता है कि एक के बाद दूसरे को अपनी जद में ले लेता है उसके लिए छोटा-बड़ा अमीर गरीब सब एक समान हैं लेकिन फिलहाल सयाना बना ये मी टू वायरस भी इस घोर कलयुग में सिर्फ बड़े लोगों को ही अपनी जद में ले रहा है रब खैर करे कि ये वायरस अभी उच्च और नामचीन लोगों तक ही सीमित है लेकिन वक्त का क्या पता कहीे अति उत्साहित होकर ये मी टू वायरस मध्यम परिवार की तरफ बढ़ गया तो फिर क्या होगा बहरहाल इस मीटू की पूरी जंग में पुरूष ही बलि की बेदी पर चढ़ा हुआ है। आखिर हमारा देश पुरूष प्रधान देश है इस लिहाज से शब्द बाण व्यंग्य बाण और शक्ति बाण का सामना इस पुरूष जाति को ही करना है। जी मै बात कर रहा था क्या मी टू कैम्पेन के साथ-साथ बी टू पर भी ऐसा ही देशव्यापी कैम्पेन चलेगा क्योंकि ये भी महिलाओं से जुड़ा मुददा है जिसकी मार पुरूष ही झेलता है जबकि ये बी टू वायरस मीटू वायरस से कहीं ज्यादा जानलेवा है। अब बी टू वायरस क्या है शायद आपकी समझ में अभी न आया हो लेकिन आपकी उत्सुक्ता को मैं जल्द खत्म करे देता हूं तो जनाब बी टू वायरस ने उच्च पदासीन धनाढय और नामचीन लोगों को अपनी जद में नहीं लिया है जैसा कि मीटू वायरस ने। शायद मीटू और बी टू ने आपस में समझौता किया होगा इसीलिए मीटू उच्च लोगों में और बी टू मध्यम लोगों को सता रहा है। ये वायरस इतना मानसिक उत्पीड़न करता है कि इंसान को आत्महत्या तक करने पर मजबूर कर देता है । येे बी टू वायरस का नाम है रिश्वतखोरी जिससे पूरा देश कराह रहा है। आपको छोटे से लेकर बड़े काम करवाने हों तो जब तक आपके पास देने के लिये सुविधा शुल्क न हो तो समझ लीजिए आप उसी जगह पर खड़े रहेंगे । मेरी समझ से इस वायरस से पुरूष ओर महिला दोनों का ही मानसिक उत्पीड़न तो हो ही रहा है फिर इस पर महिलाये देशव्यापी चर्चा क्यों नहीं करतीं ये भी तो एक वक्त में आकर अपने आप को सुरक्षित रखने का साधन बन सकता है। इसके लिये कैम्पेन क्यों नहीं क्या ये बहस और बहिष्कार का मुददा नहीं है। मीटू पर तो सियासी रोटियां सिक रहीं है लेकिन इस पर चुप्पी क्यों समझदार सियासी पार्टियां जीरो टालरेंस की बात करके हमे दिलासा देती हैं लेकिन वहां भी बी टू वायरस अपने पंजे गड़ाये हुये है। ये वायरस मीटू वायरस से ज्यादा खतरनाक है मीटू एक छोटे बर्ग को प्रभावित कर रहा है लेकिन बी टू वायरस तो एक बहुत बड़े वर्ग को प्रभावित कर रहा है इसका जहर ऐसा है जो इंसान को आत्महत्या करने के लिये मजबूर कर देता है जो जैनरेशन गैप का द्योतक है। लिहाजा देश की हर महिला को इसके लिये भी वृहद स्तर पर कैम्पेन चलाना जरूरी है क्योंकि बेचारा असहाय पुरूष दोनों ही वायरस का दंश झेल रहा है।़ बहरहाल मी टू से ज्यादा आवश्यकता है बी टू पर कैम्पेन चलाने की । ये दावे के साथ कह सकता हूं जिस दिन सारे हास्यापद निरर्थक कैम्पेन से अलग हटकर देश की महिलाये बी टू पर देशव्यापी कैम्पेन शुरू कर देंगी समझ लीजिए उसके बाद देश में लोकपाल बिल की आवश्यकता ही नहीं रहेगी।

Prem

Prem

Sud-Editor

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