[मुंशी प्रेमचंद जन्मदिन विशेष] आज का युवा जो पढ़ने से ज्यादा लिखने में लगा हुआ है उसे थोड़ा ध्यान पढ़ाई की तरफ भी देना चाहिए – अंकुर मिश्रा

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आज कल हम थोड़ी परेशानियों से परेशान होकर, थक हारकर जिंदगी से दूर भागने लगते है ! लोगो को कोशने लगते है, मगर क्या कभी हम ऐसे लोगो के बारे सोचते है जिन्होंने परेशानियों, विपत्तियों का सामना करते हुए आगे आकर काम किया, उनका सामना किया और हर परिस्थिति में खड़े रहे ! आज से १३८ साल पहले बनारस के पास एक ऐसे व्यक्ति का जिसने बचपन से ही विपत्तियों को अगल बगल देखा! मै बात कर रहा हूँ ‘मुंशी प्रेमचंद’ की जिन्होंने बचपन से ही घर में परेशानियाँ  देखी, और मात्र १५ साल की आयु में घर वालो ने विवाह करवा दिया, १५ साल की उम्र में लोगो को सही और गलत के बीच में फर्क भी नहीं पता होता !
बचपन से ही रोटी, कपडा और मकान का संघर्ष साथ चल रहा था और शादी होने के बाद विपत्तियां और टूट पड़ी ! शादी के एक साल बाद ही पिता जी का देहांत हो गया, तो अब घर की सभी जिम्मेदारियां इस 16 साल के बच्चे पर आ गयी ! आँखों में सपना था वकील बनने के मगर गरीबी और जिम्मेदरियो ने जिंदगी कहीं और पंहुचा दी ! पहले घर के खर्चे चलाने के लिए खुद की किताबे बेचीं  और बाद में एक वकील के यहाँ 5 रुपये महीने में ट्यूशन पढ़ाने लगे ! इस 5 रुपये में से 3 रुपये घर भेजते थे और 2 रुपये में खुद का खर्चा चलाते थे !
जिंदगी और पढ़ाई के लिए कभी नंगे पांव स्कूल जाते थे और कभी किताबे बेचते थे ! क्या आज का युवा 5 रुपये में जीवन व्यापन कर सकता है? जिंदगी कितनी महँगी हो गयी हो मगर इंसान से इंसानियत और संतुष्टि बहुत दूर चली गयी है! आज अगर इंसान को तंगी के जीवन जीना पद जाता है तो जिंदगी को कोशने लगते है, घर वालो को कोशने लगते है समाज और सरकार को कोशने लगते है! मगर जिंदगी को नहीं समझते !
परिस्थितिया इंसान को परेशान करती है मगर इंसान चाहे तो इन सब को बार करके इतिहास भी लिख सकता है जैसे मुंशी प्रेमचंद ने किया !
पारिवारिक और सामाजिक परेशानियों को देखने के बाद भी जो पढ़ने और लिखने में रूचि थी उसे जारी रखा! किताबें खरीद नहीं सकते थे तो उन्होंने एक किताब की दुकान में ही सभी नावेल पढ़ डाले ! हिंदी और उर्दू में अच्छी पकड़ तो थी ही और उसे कभी कमजोर नहीं होने दिया,  किताबो और नए पुराने लोगो को पढ़ना हमेशा जारी रखा !
 
आज के लेखकों के लिए सबसे बड़ा सन्देश मुंशी प्रेमचद की जिंदगी से यही है कि पढ़ना कितना जरूरी है, आज का युवा जो पढ़ने से ज्यादा लिखने में लगा हुआ है उसे थोड़ा ध्यान पढाई की तरफ भी देना चाहिए !
 
13 साल की ऊपर से नाटकों को लिखना शुरू करने के बाद मुंशी प्रेमचद ने उपन्यासों की तरफ रुख किया, और यही से मुंशी जी के साहित्य का सफर शुरू हुआ ! तभी प्रेमचंद अपनी इस दुनिया में व्यस्त थे और उनकी पहली पत्नी घर छोड़कर मायके चली गयी और कभी वापस नहीं फिर 1905 में प्रेमचंद ने दूसरी शादी की !
वक्त बदलता है, वक्त की सबसे बढ़ी ख़ासियत यही है की वक्त अच्छा हो या बुरा हो गुजर जाता है ! मुंशी जी की जिंदगी में भी बदलाव आया, शिक्षक के पद पर पदोन्नति हुयी और साथ साथ लेखन में सजगता आयी ! इसी समय पर प्रेमचंद का पहला पांच कहानियों का संग्रह आया ! उन्होंने कुल १५ उपन्यास, ३०० से कुछ अधिक कहानियाँ, ३ नाटक, १० अनुवाद, ७ बाल-पुस्तकें तथा हजारों पृष्ठों के लेख, सम्पादकीय, भाषण, भूमिका, पत्र आदि की रचना की ! मुंशी प्रेमचंद की रचना-दृष्टि विभिन्न साहित्य रूपों में प्रवृत्त हुई! बहुमुखी प्रतिभा संपन्न प्रेमचंद ने उपन्यास, कहानी, नाटक, समीक्षा, लेख, सम्पादकीय, संस्मरण आदि अनेक विधाओं में साहित्य की सृष्टि की। प्रमुखतया उनकी ख्याति कथाकार के तौर पर हुई और अपने जीवन काल में ही वे ‘उपन्यास सम्राट’ की उपाधि से सम्मानित हुए।
उनकी रचनाओं की लम्बी लिस्ट विकिपीडिया से देख सकते है!
कुछ रचनाएँ जो हमेशा मुसंहि प्रेमचंद की याद दिलाती रहती है:
क़लम के जादूगर!
अच्छा है,
आज आप नहीं हो|
अगर होते,
तो, बहुत दुखी होते|
आप ने तो कहा था
कि, खलनायक तभी मरना चाहिए,
जब,
पाठक चीख चीख कर बोले,
मार – मार – मार इस कमीने को|
पर,
आज कल तो,
खलनायक क्या?
नायक-नायिकाओं को भी,
जब चाहे ,
तब,
मार दिया जाता है|
फिर जिंदा कर दिया जाता है|
और फिर मार दिया जाता है|
और फिर,
जनता से पूछने का नाटक होता है-
कि अब,
इसे मरा रखा जाए?
या जिंदा किया जाए?
सच,
आप की कमी,
सदा खलेगी –
हर उस इंसान को,
जिसे
मुहब्बत है,
साहित्य से,
सपनों से,
स्वप्नद्रष्टाओं,
समाज से,
पर समाज के तथाकथित सुधारकों से नहीं|
हे कलम के सिपाही,
आज के दिन
आपका सब से छोटा बालक,
आप के चरणों में
अपने श्रद्धा सुमन,
सादर समर्पित करता है !
उनकी कुछ रचनाये हम कविशाला पर पढ़ सकते है !
एक वार्ता के दौरान मुंशी प्रेमचंद से उस वक्त के पत्रकार बनारसीदास चतुर्वेदी ने 1930 में उनकी प्रिय रचनाओं के बारे में प्रश्न किया कि – “आपकी सर्वोत्तम पन्द्रह कहानियां कौनसी हैं?”
प्रेमचंद ने उतर दिया :
  1. बड़े घर की बेटी
  2. रानी सारन्धा
  3. नमक का दरोगा
  4. सौत
  5. आभूषण
  6. प्रायश्चित
  7. कामना
  8. मन्दिर और मसजिद
  9. घासवाली
  10. महातीर्थ
  11. सत्याग्रह
  12. लांछन
  13. सती
  14. लैला
  15. मन्त्र”
कभी वक्त मिले तो इन्हे जरूर पढ़िए ! प्रेमचंद के बारे में जरूर पढ़िए और उनका सदेश हमेशा यही रहा है की लिखने से ज्यादा पढ़ने पर ध्यान दीजिये जिससे खुद की लेखनी में सुधर होगा और परिपक्वता आएगी !
लेखक – अंकुर मिश्रा 
लेखक कविशाला के फाउंडर है और साहित्य के लिए कई संस्थाओ के साथ काम कर रहें है !!

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