नाबालिग बच्चों का कारोबार

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सन् 1991 के बाद भिखारियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिली. एक अनुमान के तहत दिल्ली में करीब सवा लाख के भिखारी है. यदि इनकी आय पर गौर किया जाए तो इनका अनुमानित कारोबार सालाना तकरीबन 215 करोड़ रुपये का है.पढिए प्रीति चौहान की रिपोर्ट 

कहीं जाते समय चौराहों पर अक्सर हमारी नजर उन महिलाओं पर पड़ती है जो अपने बीमार बच्चे को लेकर रेड लाइट पर खड़ी गाड़ियों के नजदीक जाती हैं, और बच्चे का हवाला देकर उनसे पैसे मांगती हैं. उनकी गोद में ये बच्चे बिना कुछ कहे भी अपने हालात बयान कर देते हैं. कुछ बच्चों के हाथ-पैर पर घाव हो रहें होंगे, तो कुछ के जिस्म जले हुए.

कभी ये सच्चे लगते हैं तो कभी ये बेमानी. बच्चों को कमर पर बांधे ये औरतें जिस तरह से भीख मांगती है, उसको देखकर दया का भाव आना लाजिमी है. अधनंगे शरीर पर मैले-कुचैले कुछ कपड़े..शरीर पर लिपटी धूल, शरीर की सफाई का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं. इन बच्चों के शरीर को देखकर लगता है कि इनकी पसलियों की गिनती भी आसानी से हो सकती है.

क्या ऐसे भी मां-बाप होते है जो सिर्फ भीख की बदौलत ही अपने बच्चों को धूप-छांव, बरसात, सर्दी में ऐसे ही रखते हैं, ताकि उनको भीख में मिलने वाले पैसे ज्यादा मिलें. क्योंकि भीख का उसूल भी है कि जितना ज्यादा दरिद्र और दयनीय दिखोगे, भीख भी ज्यादा मिलेगी. खासकर इस धंधे में मासूम बच्चों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा है. शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे तो और दया का पात्र बन जाते हैं. बच्चे भूख प्यासे है, खाना नहीं, चोट लगी है पट्टी नहीं, ये ही असूल है भीख का.

*दुधमुंहे बच्चों का करते हैं इस्तेमाल*

अक्सर भीख मांगने वाली महिलाओं के पास छोटे बच्चे बहुतायात में होते हैं. कभी इन बच्चों को देखने पर लगता है कि इनके मां-बाप नहीं है, न बच्चे का रंग न रूप इनसे मिलता है न इन औरतों का इन बच्चों से लगाव लगता है. बस लगता है तो बच्चे पैसा कमाने का जरिए हैं.

*भीख के धंधे से जुड़ी है छोटे बच्चों की किडनैपिंग*

बड़े-बड़े शहरों में अक्सर बच्चों की किडनैपिंग का तो आए दिन खबरें आती रहती हैं. अलग-अलग शहरों से छोटे बच्चों को उठा लेते हैं. न जाने कितने केस है जो सामने भी नहीं आते हैं. .

हाल ही में गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर के विभिन्न हिस्सों में वर्ष 2016 में 54,723 बच्चों का अपहरण हुआ है। मंत्रालय ने कहा बच्चों के चोरी के डर को बेबुनियाद नहीं कहा जा सकता है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक लगभग 55 हजार बच्चों का अपहरण वर्ष 2016 तक हो चुका है।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट वर्ष 2017-18 के मुताबिक वर्ष 2016 में 54,723 बच्चों का अपहरण किया जा चुका है परन्तु मात्र 40.4 प्रतिशत मामलों में ही आरोप पत्र दाखिल किए गये हैं।

भीख माफ़िया’ करता है बच्चों को विकलांग

बाल अधिकार कार्यकर्ता कहते हैं कि इन बच्चों को भूखा रहने पर मजबूर किया जाता है ताकि वो कमज़ोर दिखें और उन्हें सहानुभूति मिल सके. बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ‘भीख माफ़िया’ बच्चों को विकलांग बना देता है क्योंकि विकलांग बच्चों को ज़्यादा भीख मिलती है. इस धंधे के लिए गिरोह में छोटे और अपंग बच्चों का खूब इस्तेमाल किया जाता है. गिरोह में शामिल लोग बच्चे का अपहरण कर उनसे भीख मंगवाते हैं. ऐसा न करने पर बच्चों को भूखा रखा जाता है और मारा-पीटा जाता है. लेकिन एक अनुमान के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में तकरीबन दो लाख से ज्यादा बच्चे इस धंधे से जुड़े हैं.

भीख मांगना अपराध

55 साल पुराने एक कानून के मुताबिक दिल्ली समेत भारत के कई शहरों में भीख मांगना गैर कानूनी है. भिक्षावृति को कानूनन अपराध घोषित करने के बावजूद भिखारियों की तादाद कम नहीं हुई.

भिक्षावृत्ति की समस्या से निपटने के लिए अब तक दिल्ली सहित अधिकतर राज्यों ने भिक्षावृत्ति को रोकने से जुड़े बम्बई भिक्षावृत्ति अधिनियम, 1959 को अपनाया है, जिसके तहत पुलिस अधिकारी को बिना वॉरंट के किसी भिखारी को गिरफ्तार करने का अधिकार है.

एक सर्वेक्षण के अनुसार सन् 1991 के बाद भिखारियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिली. एक अनुमान के तहत दिल्ली में करीब सवा लाख के भिखारी है. यदि इनकी आय पर गौर किया जाए तो इनका अनुमानित कारोबार सालाना तकरीबन 215 करोड़ रुपये का है.

चाइल्ड बैगिंग एक्ट देश में लागू

चाइल्ड बैगिंग एक्ट देश में लागू है या नहीं ये तमाम राज्यों के प्रशासन व पुलिस को मालूम ही नहीं है. जबकि संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन आफ चाईल्ड राइट्स को 1989 में अपनाया गया था व दुनिया के अन्य देशों को इसमें संशोधन कर इसे लागू करने की हिदायतें दी गई थी. दिल्ली व देश के अन्य भागों में बोम्बे प्रिवेंशन ऑफ बैगिंग एक्ट 1959 लागू है. गौरतलब है कि संशोधित किशोर न्याय कानून-2015 में बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ सख्त प्रावधान किए गए हैं.

Anil Anup

Anil Anup

राज्य ब्यूरो प्रभारी पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर l

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