हर दर्द सहकर तय कर रहे आस्था का सफर

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कौशल किशोर मिश्रा ब्यूरो चीफ अमेठी


अमेठी : जहां चाह, वहीं राह। ईश्वरीय आस्था कहें या कु छ अलग कर गुजरने का जुनून। बात कु छ भी हो, लेकिन डेढ़ माह पहले बाराबंकी जिले के देवा शरीफ की सरजमी से दंडवत परिक्रमा करते हुए तिलोई के धर्मे धाम के लिए निकला श्रद्धालु जब यहां पहुंचा तो देखने वालों का मजमा लग गया। पथरीले रास्ते वाले कठिन डगर में भी अपनी धुन में रमे धर्मराज कश्यप देश दुनिया को धार्मिक आस्था और ईश्वर प्राप्ति के लिए साधना का संदेश दे रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब उन्होंने यह दूरी तय की है, बल्कि वर्ष 2014 में भी वे यह कठिन डगर तय कर चुके हैं।

बाराबंकी जिले के देवा शरीफ के पास स्थित जौलिया बनारसपुर निवासी धर्मराज कश्यप सतनाम पंथी हैं, जो कोटवा धाम से ताल्लुक रखने वाले कमौली धाम गुरुद्वारा खजुरी के शिष्य हैं। धर्मराज ने बिना किसी दूसरे का सहयोग लिए दंड परिक्रमा करते हुए धर्में धाम की यात्रा तय करने की ठान ली। भादौ मास के अंतिम शनिवार यानी दो सितंबर 2017 को वे इस यात्रा पर निकल पड़े और धर्मे धाम के करीब आ पहुंचे। उनकी यात्रा रस्ता मऊ के करीब आ पहुंची है। वे मंजिल से महज बीस किलोमीटर दूर हैं। 52 दिनों में वे करीब 90 किलोमीटर की यात्रा तय कर चुके हैं। वे प्रतिदिन दो से ढाई किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। रात्रि में पड़ाव कर वे भोर में ही फि र मंजिल तय करने में तल्लीन हो जाते हैं। खास बात है कि वे यात्रा के दौरान अन्न से परहेज रखते हुए महज फलाहार करते हैं। धर्में धाम के प्रति उनकी आस्था है। यही वजह है कि वे दोबारा धर्में धाम की यात्रा तय कर रहे हैं। बकौल, धर्मराज गुरु से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।

Ashok Shrivastav

Ashok Shrivastav

State Head Uttar Pradesh

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