पुलिस विभाग के कमाई का जरिया बना अमेठी में दुकान के सामने खड़ी मोटरसाइकिले

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चन्द्र मोहन मिश्रा अमेठी की रिपोर्ट

अमेठी । सरकार किसी की भी पार्टी की हो शासन कितना ही सख्त क्यों न हो, पर कमाने वाले अपना जरिया ढूढ़ लेते है इसी तरह यूपी पुलिस अपनी कमाई के लिए रोज नए तरीके खोज रही है और निकाल भी लेती है। अब ज़िले की क्रीम कोतवाली में गिनी जाने वाली अमेठी कोतवाली के कोतवाल को ही ले लीजिए। जनाब को चौराहे पर चेकिंग लगाकर वसूली करने से पेट नही भरा तो जनाब ने सड़क किनारे खड़े वाहनों को कब्जे में लेकर 2500 रुपए वसूलने शुरु कर दिये हैं।

बीजेपी विधायक जी रहती है अमेठी में –
आपको बता दें अमेठी ज़िला वीवीआईपी ज़िलों में शुमार होता है, इसलिए क्या गांव, क्या मोहल्ले और क्या थानें, सभी कोतवाली अपना महत्व रखती हैं। इन सब में अमेठी कोतवाली का अपना अलग ही स्टेटस है। जहां गांधी परिवार का यहां वर्षों से जुड़ाव है वहीं, राजघराने की हवेली यहीं बस्ती है। साथ ही यहां वीआईपी लोगों का यहां आना-जाना लगा रहता है। सोने पर सुहागा ये है कि फिलहाल यहां की विधायक राजघराने की पहली बहू रानी गरिमा सिंह यहां ठहरी हैं।

कोतवाली अमेठी में विवादों का चोली-दामन जैसा साथ-

ऐसे वीआईपियों के इलाके में विवादों से चोली-दामन जैसा साथ रखने वाले अमेठी कोतवाली के प्रभारी भरत उपाध्याय ने गुरुवार शाम को चेक पोस्ट लगा दी। प्रभारी महोदय के निशाने पर सड़क के किनारे खड़े वाहन थे।
नियमों के सवाल पर बगले झांकते रहे कोतवाल-
महोदय ने सड़क पर खड़े दर्जनों वाहनों को कब्जे में लिया जिनका 2500 -2500 रुपये का जुर्माना काटा। जब उनसे सवाल हुआ कि ये निर्देश कब आया, तो वो बगले झांकते रहे। लेकिन महोदय के इस क़दम ने सवाल दर सवाल खड़े कर दिये।
ज़िले को बनकर तैयार हुए क़रीब 7 सालों से भी अधिक समय हो गया है। शासन-प्रशासन ने समूचे ज़िले में खासकर अमेठी कोतवाली इलाके में पार्किंग एरीया का निर्माण कहाँ कराया है? गाँव-देहात से आने वाला आम आदमी अमेठी मार्केट शापिंग करने आएगा तो क्या पार्किंग न होने के अभाव में बाइक अपने कांधों पर उठाकर मार्केटिंग करे ।

Ashok Shrivastav

State Head Uttar Pradesh

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