छोटी दीपावली, यम चतुर्दशी को अंधेरा मिटाने को जले दीप

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कौशल किशोर मिश्रा ब्यूरो चीफ अमेठी

अमेठी। हिन्दुओ की आज छोटी दीपावली है। यह यम चतुर्दशी है जिसे रुप चतुर्दशी नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है. सुगंधित दृव्यो व औषदियो से स्नान करके यम को जलाजंली करके उनके निमित दिपदान किया जाता ह।
चुंकी स्नान का महत्व है सो ये रुप चतुर्दशी भी कहा जाता है. कालिकन भवानी मंदिर के पीठाधिश्वर आचार्य श्री प्रकाश महाराज ने बताया कि वेद शास्त्रो के अनुसार ईसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करके 16000 राजकुमारियो को उसकी कैद से मुक्त कराया व चुंकी वो पराये पुरुष के अधिन रह चुकी थी उनको कोइ अपनाता नही सो स्वंय भगवान कृष्ण ने उनसे विवाह किया सो इसको नरक चतुर्दशी कहा जाता है व भगवान के विवाह की बारात के स्वागत के लिये सांयकालीन दिपमालिका सजाइ जाती है।
धनतेरस के बाद से दीपावली की तैयारयां छोटी दीपावली के दिन से शुरु हो जाती है। लोग घर और प्रतिष्ठानो पर दीप जलाकर महालक्ष्मी की पूजा अर्चना शुरु कर देते है। वही अहिर वंश के लोग महाराला बली के पूजा अर्चना का कार्यक्रम शुरु कर देते है। नगाडो की ध्वनि यदुवंशी के बस्तियो में सुनाई देती है।
धनतेरस की शायं को बड़ी बड़ी इमारते विद्युत की दूधिया रोशनी से नहा उठी थी। होटल रेस्टोरेन्ट और बड़े बड़े प्रतिष्ठान अंधेरे को दूर करने के लिए और असत्य से सत्य की ओर बढ़ने के लिए दीपावली का पर्व पांच दिनो तक मनायेगे। आचार्य कृष्ण देव शुक्ल बताते है कि मथुरा वृन्दावन में धनतेरस से पांच दिन तक दीप महोत्सव मनाया जाता है। लेकिन नरक चतुर्दशी के दिन अलौकिक छटा देखने को मिलती है। क्योंकि स्वंय कृष्ण भगवान अनेक पटरानियो से विवाह कर उन्हे स्वर्ग लोक पहुचाने का काम किया।

Ashok Shrivastav

Ashok Shrivastav

State Head Uttar Pradesh

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