अब फादर कीटो…….

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अनिल अनूप

दिल्ली के आर्कबिशप कुटो ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले ईसाइयों को अपील करते हुए एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में विध्वंसकारी राजनीतिक माहौल बना हुआ है। इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने एक प्रार्थना मुहिम चलाने की बात भी कही थी। कई धार्मिक संगठनों को लिखे पत्र में 2019 चुनाव का हवाला दिया गया था। हालांकि बाद में उन्होंने साफ किया कि उनके पत्र का केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार से कोई लेनादेना नहीं है। सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बयान से साफ दिखता है कि दिल्ली के आर्कबिशप कुटो पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं।

अब गोवा व दमन के फादर फिलिप नेरी फेरारो ने ईसाई समुदाय से कहा है कि संविधान व लोकतंत्र खतरे में है। लिहाजा वे राजनीतिक सक्रियता बढ़ाये। अतीत में जिस तरह आर्कबिशप कुटो ने इसाइयों को लोकतंत्र व संविधान को खतरे में बताते हुए ईसाइयों को सक्रिय होने को कहा था उसी बात को फादर फेरारो ने दुहराया ही है। विदेशी सहायता प्राप्त कर रही चर्च द्वारा इस प्रकार के पत्र लिखकर जनता में भ्रम व भ्रांतियां फैलाना व देश की व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करना अति चिंतनीय ही है। कटु सत्य यह है कि मोदी सरकार द्वारा चर्च को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर नियमानुसार शिकंजा कसा है, इसलिए ईसाई संगठन तड़प रहे हैं और मोदी सरकार को ही कटघरे में खड़ा करने के प्रयास में हैं। ईसाई धर्म गुरु एक सोची समझी योजना के तहत ही यह सब कुछ कर रहे हैं ताकि 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार तथा भाजपा वापस सत्ता में न आ जाए।

सत्य तो यह है कि मोदी सरकार संविधान के अनुसार ही कार्य कर रही है। ‘सबका साथ सब का विकास’ ही उसका लक्ष्य है। अतीत में जायें तो 90 के दशक में भी भाजपा के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए भाजपा को लेकर कई प्रकार के भ्रम फैलाये जाने का प्रयास हुआ था, तब भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में भाजपा की नीतिगत बातों को दोहराया था, आज वही बातें आप सम्मुख रख रहा हूं। ‘भारतीय जनता पार्टी असंदिग्ध रूप से पंथ निरपेक्षता के प्रति, जैसा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने उसकी कल्पना की थी, वचनबद्ध है। द्य भारतीय जनता पार्टी धर्मतंत्र को अस्वीकार करती है। हम लोग भारत को पाकिस्तान का हिन्दू रूप नहीं बनने देंगे। भारतीय जनता पार्टी दृढ़ता के साथ जीवन और सम्पत्ति की रक्षा के अधिकार के प्रति वचनबद्ध है। दंगा करने वाला दंगाई है और उसके खिलाफ कानून के अन्तर्गत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उसको उसके धर्म या जाति अथवा उसके सम्पर्कों के कारण कोई संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। इन सिद्धांतों का सावधानी के साथ पालन करने से भारतीय जनता पार्टी की चार सरकारें अपने राज्यों में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाये रख सकीं। यह कहने के उपरांत मैं कुछ और विषयों का उल्लेख करूंगा, जो नकली या झूठे धर्म निरपेक्षतावादी हमारे विरुद्ध आरोप लगाते हैं, यद्यपि उनमें से कई निजी तौर पर हमारे रवैये के ठीक होने का समर्थन करते हैं। द्यभारतीय जनता पार्टी समान सिविल कोड के बारे में संविधान के निदेशक तत्त्वों को लागू किये जाने के पक्ष में है। समान सिविल कोड किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करने के लिए बाध्य नहीं करेगा।

अगर एक मुसलमान समान सिविल कोड के साथ ब्रिटेन या अमरीका या जापान का नागरिक होने के बावजूद अच्छा मुसलमान रह सकता है, तो वह भारत में भी अच्छा मुसलमान रह सकता है। द्य भारतीय जनता पार्टी अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के पक्ष में है। इस अनुच्छेद को अस्थायी उपाय के रूप में बनाया गया था। यह अब जम्मू-कश्मीर और शेष देश के बीच मनोवैज्ञानिक बाधा बन गया है। इसने उस राज्य के लोगों को पाकिस्तान की कुचालों का आसान लक्ष्य बना दिया है। द्य भारतीय जनता पार्टी बंगलादेशी मुसलमानों की बड़े पैमाने पर गैर कानूनी घुसपैठ के विरुद्ध है। उनको वापिस जाना होगा। भारत डेढ़-दो करोड़ लोगों को अपने यहां खपा नहीं सकता।

भारतीय जनता पार्टी कुछ उग्रवादी मुसलमान नेताओं के विरुद्ध है, जो हमारी आन्तरिक समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करना चाहते हैं। द्य भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक आयोग के स्थान पर मानव अधिकार आयोग की स्थापना के पक्ष में है, जो सभी समूहों और व्यक्तियों के विरुद्ध भेदभाव की सभी समस्याओं का निराकरण करेगा, चाहे ये लोग अल्पसंख्यक हों अथवा बहुसंख्यक। देश ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकता जिसमें कश्मीर के हिन्दुओं के पास अपनी शिकायतें दूर कराने के लिए कोई मंच न हो, क्योंकि देश में हिन्दू बहुमत में हैं। द्य और निस्सन्देह भारतीय जनता पार्टी रामजन्मस्थान पर एक राममंदिर बनाने के पक्ष में है भारतीय जनता पार्टी अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के पक्ष में है। इस अनुच्छेद को अस्थायी उपाय के रूप में बनाया गया था। यह अब जम्मू-कश्मीर और शेष देश के बीच मनोवैज्ञानिक बाधा बन गया है। इसने उस राज्य के लोगों को पाकिस्तान की कुचालों का आसान लक्ष्य बना दिया है। द्य भारतीय जनता पार्टी बंगलादेशी मुसलमानों की बड़े पैमाने पर गैर कानूनी घुसपैठ के विरुद्ध है। उनको वापिस जाना होगा। भारत डेढ़-दो करोड़ लोगों को अपने यहां खपा नहीं सकता।

भारतीय जनता पार्टी कुछ उग्रवादी मुसलमान नेताओं के विरुद्ध है, जो हमारी आन्तरिक समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करना चाहते हैं। द्य भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक आयोग के स्थान पर मानव अधिकार आयोग की स्थापना के पक्ष में है, जो सभी समूहों और व्यक्तियों के विरुद्ध भेदभाव की सभी समस्याओं का निराकरण करेगा, चाहे ये लोग अल्पसंख्यक हों अथवा बहुसंख्यक। देश ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकता जिसमें कश्मीर के हिन्दुओं के पास अपनी शिकायतें दूर कराने के लिए कोई मंच न हो, क्योंकि देश में हिन्दू बहुमत में हैं। द्य और निस्सन्देह भारतीय जनता पार्टी रामजन्मस्थान पर एक राममंदिर बनाने के पक्ष में है। मथुरा और वाराणसी हमारी कार्यसूची में नहीं है। हमें विश्वास है कि हमारे विपक्षियों का रवैया मुख्य रूप से चुनावी स्वार्थ से प्रेरित है।

पिछले चार दशकों से, देश के अल्पसंख्यकों का इस्तेमाल वोट बैंक की तरह किया गया है। उनके अपने नेता दिनोंदिन अधिकाधिक दकियानूसी होते जा रहे हैं। आज राष्ट्र, विशेष रूप से मुस्लिम अल्पसंख्यक, अशिक्षा, गरीबी और अपने कथित नेताओं की बेडिय़ों से पीडि़त हैं। उनको भारतीय जनता पार्टी से खतरा नहीं है, बल्कि ऐसे राज्य से है जो शासन नहीं कर सकता, उन पार्टियों से है, जो उन्हें केवल वोटर (मतदाता) के रूप में देखती है और ऐसे नेताओं से है जिन्होंने उन्हें गुमराह कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी विश्वास करती है कि भारत एक देश है और भारत की जनता एक है। हम विश्वास करते हैं कि सभी भारतीय, चाहे वे किसी धर्म के मानने वाले हों, बराबर हैं और इसलिए उनके समान अधिकार और समान कर्तव्य हैं। हमारा विश्वास है कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद देश की एकता का सबसे मजबूत आधार है। हमारा यह भी विश्वास है कि भारत की पंथनिरपेक्षता का कारण उसकी संस्कृति का हिन्दू आचारविचार है।’

भाजपा आज भी उपरोक्त बातों पर खड़ी है। मुसलमान और ईसाई समुदायों के साथ अन्य अल्पमत समुदायों और दलितों के मन में संदेह पैदा कर या दूरी पैदा करके सत्ता में वापसी की चाह रखने वाले नेता व राजनीतिक दल ही अल्पमत समुदायों में दहशत फैला अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना चाह रहे हैं और आर्कबिशप कुटो और फादर फेरारो उनके हाथों ही खेल रहे हैं। यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है, ईसाई धर्म गुरुओं को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।

Anil Anup

Anil Anup

राज्य ब्यूरो प्रभारी पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर l

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