ओरिजिनल लाइफ vs डिजिटल लाइफ…

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प्रेम कुमार :- वर्तमान में हम लोग वर्चुअल ज़िन्दगी में जी रहे है (डिजिटल एरा) हम आज के समय एक दूसरे से किसी न डिजिटल जरिये से जुड़े रहते या फिर ये कहे कि हम लोगो की वास्तविक दुनिया तो खत्म सी होती जा रही हम फेसबुक, व्हाट्सअप और अनेको डिजिटल प्लेटफॉर्मो तक ही सिमट कर रह गए है , जिसमे हम लोगो को जोड़ते जा रहे बस केवल फ़ॉलोअर्स बढ़ाने के लिए और इसी कारण हम उस अमूल्य चीज खोते जा रहे है जिसे हम वड़त्वीकता कहते है , हमारे पास आज परिवार के लिए समय भाई के लिए समय बस हम समय व्यतीत कर रहे है तो वर्चुअल लाइफ में किसी दूसरे का नही मैं खुद की बात बताता हूं,
फेसबुक फ्रेंड्स 3209, कॉन्टेक्ट्स 700 से भी ज्यादा और व्हाट्सअप पर 350 से ज्यादा , पर मुझसे पूछा जाए कि इनमें से कितने तुम्हारे साथ खड़े हो सकते है तब शायद मेरे जवाब होगा 10 या 12 ये लोग और वो भी वो जिनके साथ मेने अपनी स्कूल और कॉलेज पूरा किया है और इसके अलावा बात करू तो मेरा परिवार जिनकी मैं 10 कॉल्स भी इग्नोर कर लेकिन वो मेरी एक भी काल इग्नोर नही करते,
इस डिजिटल के चक्कर मे आकर हमने अपनी वास्तविकता ही खो दी
ये सवाल मेरा खुद से है

“क्या प्राप्त किया मैंने वर्चुअल लाइफ से ?
जिसका जवाब शायद अभी तक नही मिला मुझे…

Prem

Prem

Sud-Editor

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