कांग्रेस से अमेठी लोकसभा सीट छीनना भाजपा के लिए आसान नही

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अमेठी मे काग्रेस ने हमेशा अपनी किले बन्दी मजबूत करने के लिए क्षेत्र को महत्व दिया ।प्रदेश और देश की सत्ता से दूर होने के बावजूद काग्रेस नेतृत्व ने इस क्षेत्र को महत्व देते हुए जहां अमेठी नरेश डा0 संजय सिंह को राज्य सभा भेजा वही गौरीगंज विधान सभा के निवासी दीपक सिहं को प्रदेश में विधान परिषद में भेज कर अपनी लोकसभा चुनाव की कील- काटी मजबूत की है ।
*दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी है।*अमेठी संसदीय क्षेत्र की एक मात्र विधान सभा सीट गौरीगंज है जिस पर स्व राजीव गाॅधी के समय से ही अपने जनाधार वाले संघ के प्रचारक रहे तेजभान सिंह को प्रत्याशी बनाया और अपने जमीनी जुडाव के चलते वे गांधी नेहरू परिवार के संसदीय क्षेत्र में चार बार विधायक रहे । तथा जितने चुनाव लडे जिनमे वे पराजित भी हुए तो जीतने वाले प्रत्याशी से थोडे ही वोटो से हारे।
पहली बार ऐसा हुआ है जब इस सीट पर भाजपा कमजोर और कहा जाए तो बहुत कमजोर हुई है। तेजभान सिहं विपरीत परिस्थितियों में जो वोट पाते रहे है वह इस बार भाजपा की लहर होने के बावजूद पार्टी प्रत्याशी नही प्राप्त कर सका।अमेठी संसदीय क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटो मे सबसे मजबूत सीट रही गौरीगंज आज उसके पास नहीं है।
ऐसे मे अब सवाल उठता है कि अमेठी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस को लोक सभा में जाने से रोकने के लिए भाजपा कांग्रेस की तरह अपने जनाधार वाले क्षेत्र के पुराने नेताओ को सरकार मे कही समायोजित करती है या नही??

 

रिपोर्ट:राहुल शुक्ला

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