दीवाली, हम प्रदूषण पैदा करके ही क्यों मनातें हैं?

  • 210
  • 200
  •  
  • 10
  •  
  •  
  •  
  •  
    420
    Shares
हम दीपावली या दिवाली क्यों मनातें है इसके अनेक कारण मिल जाएंगे, मैंने कई जगह पढ़ने के बाद कुछ निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया है जिसको पढ़कर आप किसी भी कारण की वजह से दीवाली जरूर मना सकतें है !
 
पौराणिक: प्रमुख और प्रसिद्ध कारण – 14 वर्ष के वानवास के बाद भगवान राम की सीता और लक्ष्मण के साथ वापसी,  अयोध्या के लिए यह विशेष दिन था, जिसने पूरे शहर में समारोह का वातारवरण बना दिया था ! पूरा अयोध्या हजारो दीपको के प्रकाश से प्रकाशित था सब लोग एक दूसरे से मिलकर ख़ुशी जाहिर कर रहे था !
पुराणों के अनुसार दीवाली से सिर्फ एक दिन पहले भगवान कृष्ण की पत्नी सत्यभामा द्वारा, नारकुसर की हत्या हुयी थी जिसके कारण भारत और दुनिया के अधिकांश स्थानों में इस मृत्यु का जश्न मनाया जाता है जिसे हम नरक चतुर्दशी के नाम से जानते है, इसके अगले दिन दिवाली होती है जिसमे दीपक जलाई जातें हैं !
सामाजिक: दीवाली लक्ष्मी (धन, समृद्धि और भाग्य की देवी) से जुड़ी है। भारत में यह आश्विन मास के अंत में और कार्तिका महीने की शुरुआत में पड़ता है।यह, वह समय है जब किसान अपनी कटाई खत्म करते हैं, और मौसम गिरने से सर्दीसर्दी की शुरुआत होती हैं। इसलिए इस दिन फसल के लिए देवी का शुक्रिया अदा करने के लिए लक्ष्मी पूजन का आयोजन किया जाता है और अगली फसल की अच्छाई की कामना की जाती है! व्यापारी देवी लक्ष्मी की पूजा करके पुराने किताबो को बंद करते है और नयी किताबो के साथ खाता शुरू करते है! पहले के समय में, व्यापार और व्यापारी कृषि गतिविधियों पर निर्भर रहता था, इसलिए व्यापारियों ने इस दिन को पुराने व्यापार चक्र को बंद करने और एक नया शुरू करने के रूप में लेते थे! लक्ष्मी समृद्धि की देवी होती है इसलिए इस दिन व्यापारी अपने व्यापर की समृद्धि की कामना करते है!
दीवाली आम तौर पर हिंदू कैलेंडर में अमावस्या पर पड़ती है, और यही वजह है कि अंधेरे को दूर करने के लिए लोग हर हर जगह दियाजलाते हैं और घरों को देवी लक्ष्मी की पूजा कर उनका स्वागत करते है! दीवाली सबसे ज्यादा प्रमुखता रखती है क्योकि इसमें लोग समृद्धि और भाग्य के लिए प्रार्थना करते हैं। हिंदू धर्म में लक्ष्मी को दैवीय शक्ति के रूप में भी जाना जाता है इनसे प्रमुख 5 तत्वों को ऊर्जा मिलती है- विष्णु (खुशी), कुबेरा (धन), सरस्वती (सीखना), गजेंद्र (विष्णु का पहाड़ और धन का वाहक) और इंद्र (समृद्धि और आराम)! देवी लक्ष्मी इन 5 तत्वों की तालमेल का प्रतिनिधित्व करते हुए यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक सही मात्रा में मौजूद है!
आध्यात्मिक: हिंदू दर्शन आंतरिक आत्म या आत्मा के अवधारणा पर आधारित है, जो भौतिक आत्म से परे है, जो अनंत और अनंत है। दीवाली अज्ञानता को दूर करने के लिए सच्चे ज्ञान की रोशनी का प्रतीक है, और एक उच्च जागृति लाने के लिए, जो हमें करुणा की ओर ले जाती है।
कहीं भी किसी भी ग्रन्थ में यह नहीं लिखा है की दीवाली पटाखों को फोड़कर ही मनानी चाहिए मगर फिर भी कुछ लोगो के लिए दीवाली का महत्त्व बस इसलिए है क्योंकि वो इसमें पठाखे फोड़ सकते है !
आखिर क्या जरूरत है पठाखे फोड़कर प्रदूषण फ़ैलाने की और पैसे बर्बाद करने की, क्या यही एक कारण बचा है आज दीवाली मनाने का जो हम रोजाना सबकुछ जानते हुए भी प्रदूषण फ़ैलाने में भागीदार बनते चले जा रहे है ?
दीवाली का जश्न मनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सभी रंगीन विस्फोटक भारी धातुओं और अन्य जहरीलेपदार्थो के बने होते है जो स्वास्थ्य समाज के पतन से गंभीर खतरे पैदा करते हैं! तो मेरा असली सवाल यह है की, क्या थोड़े से मनोरंजन के लिए वास्तव में पर्यावरण को प्रदूषित करना और हम सभी के स्वास्थ्य के हानी पहुंचाना सही है?
आतिशबाजी से निकला धुआं मुख्य रूप से टॉक्सिक धूल (पीएम 2.5) रखता है जो आसानी से फेफड़ों में प्रवेश कर सकता है। यह अस्थमा जैसे रोगों का एक वास्तविक खतरा पैदा करता है! आतिशबाजी दहन से धुआं में सल्फर-कोयला यौगिकों, भारी धातुओं के निशान, और अन्य जहरीले रसायनों या गैसों का मिश्रण हो सकता है। दहन बादल में ओजोन, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रिक ऑक्साइड जैसे हानिकारक धुएं फैला सकता हैं।
लोगो को यह जानकारी होते हुए भी लोग अपने मनोरंजन में थोड़ा सा भी सुधर क्यों नहीं कर सकते?
सोशल नेटवर्किंग की इस दुनिया में जब लोग एक दूसरे से इतना दूर रहते है तो क्या इस त्यौहार में एक दूसरे को और वक्त नहीं दे सकते? यह पटाखों से अच्छा और यादगार हो सकता है ! अगर आपके पास कुछ करने को नहीं है तो मै आपके साथ दिवाली मानाने के कुछ नुश्खे साझा कर रहा हूँ :
१. दीवाली में पूरे घर की सफाई आप खुद करें या घर वालो का साथ दें !
२. कपड़ो की, आभूषण की खरीददारी करें !
३. रंगोली के साथ मनोरंजन करें अपनी क्रीटविटी दिखायें !
४. घर में दिया रखने के नए नए तारीखे निजात करें !
५. आस पड़ोस वालो से मिले, नए नए दोस्त निजात करें !
६. घर वालो को वक्त दे जो आप कभी भी नहीं देतें है !
७. एक दूसरो को उपहार दें !
८. गरीबो और जरूरतमंदो को खाना खिलाये उनकी दीवाली अच्छी करने की कोशिश करें !
इत्यादि बहुत से ऐसे तरीके हैं जिनके साथ आप दिवाली उत्सव मन सकते हैं !
दीवाली का सार यही है : अच्छी तरह से खाओ, ठीक से रहो मिलजुलकर रहो, दूसरों को अच्छी तरह से शुभकामनाएँ दो!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: