सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला: अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए जस्टिस लोया को मिला था 100 करोड़ का ऑफर

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जस्टिस लोया के परिजनों का कहना है कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले  में  जल्दी और अमित शाह  के पक्ष में फैसला देने के बदले लोया को पैसे और प्रॉपर्टी का ऑफर दिया गया था.

बृजगोपाल लोया की मौत को लेकर उठे सवालों के बाद उनके परिवार ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर सुनवाई से जुड़े कुछ और खुलासे किए हैं.

द कारवां में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस लोया की बहन अनुराधा बियानी ने उस समय के बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह को घेरते हुए कहा कि मोहित शाह ने  सोहराबुद्दीन मामले को उनके मनमुताबिक फैसला देने के एवज में जस्टिस लोया को १०० करोड़ रूपए देने कि बात कही थी.

पत्रिका के एक रिपोर्टर से बात करते हुए अनुराधा बियानी ने इस बात का खुलासा किया कि मौत से कुछ समय पहले जब वो दीवाली पर जस्टिस लोया से मिली थी तब लोया ने उन्हें ये बात बताई थी. बाद में जस्टिस लोया पिता के हरकिशन लोया ने इस बात कि पुष्टि करते हुए बताया कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में पक्ष में फैसला देने के लिए जस्टिस लोया को पैसे और मुंबई में घर का प्रस्ताव दिया गया था.
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ज्ञात हो कि 2012 में सर्वोच्च न्यायलय  ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में करवाने का आदेश दिया था. उस समय यह मामला जस्टिस  जेटी उत्पत देख रहे थे.

6 जून 2014 को जज उत्पत ने मामले की सुनवाई में उपस्थित न होने को लेकर अमित शाह को फटकार लगायी, और अमित शाह को 26 जून को पेश होने का आदेश दिया, लेकिन अचानक ही 25 जून 2014 को उत्पत का तबादला पुणे सेशन कोर्ट में हो गया.

फिर इस मामले को जस्टिस बृजगोपाल लोया को सौंपा गया , लोया ने भी अमित शाह के उपस्थित न होने पर सवाल उठाये. जस्टिस लोया ने सुनवाई की तारीख 15 दिसम्बर 2014 तय की, लेकिन 1 दिसम्बर 2014 को ही उनकी मौत हो गयी.

आउटलुक कि एक रिपोर्ट के अनुसार , इस मामले के शुरुआती दौर में लोया अमित शाह की सुनवाई की तारीख को लेकर सामान्य ही थे , पर उनकी ये नरमी न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सामान्य ही थी. जस्टिस लोया ने केस दी गयी कुछ आखिरी एवं महत्वपूर्ण तथ्यों को लेकर कहा था कि अमित शाह को सुनवाई में  उपस्थित होने के मामले में यह छूट आरोप सिद्ध हो जाने तक दी जा रही थी, जस्टिस लोया के सामान्य व्यवहाय का मतलब यह नहीं था कि वो इस मामले कि सुनवाई में किसी का पक्ष लेंगे या आरोप मुक्त कर देंगे.

द कारवां के रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने जानकारी दी कि   मेरे  वकील मिहिर देसाई ने बताया था कि
लोया इस मामले की पूरी चार्जशीट (जो लगभग 10,000 पन्नों की थी) सबूत और गवाहों की बारीकी से जांच करना चाहते थे.

मिहिर देसाई ने बताया, ‘ये काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामला था और इससे एक जज के बतौर लोया की प्रतिष्ठा का फैसला हो सकता था. लेकिन दबाव तो निश्चय ही बढ़ रहा था.’

देसाई ने बताया कि , “कोर्ट रूम का माहौल काफी जटिल और तनावपूर्ण रहता था. शाह के वकील हमेशा आरोप हटा देने पर जोर दिया करते थे, जबकि हम चाहते थे कि सीबीआई द्वारा सबूत के रूप में सौंपी गई कॉल्स के ट्रांसक्रिप्ट अंग्रेज़ी में दिए जाएँ क्योंकि जस्टिस लोया और मुझको गुजराती नहीं आती थी.

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देसाई ने आगे बताया कि 31 अक्टूबर 2014 सुनवाई के दौरान लोया ने शाह के बारे में पूंछा तो शाह के वकीलों ने बताया कि शाह लोया के आदेश के अनुसार ही अनुपस्थित हैं. इस पर लोया ने कहा ये छूट केवल तब के लिए है जब अमित शाह राज्य के बहार हों, लेकिन उस समय नवनिर्वाचित महाराष्ट्र सरकार के शपथ ग्रहण के लिए शाह  मुंबई में ही थे. तब जस्टिस लोया ने अमित शाह के वकीलों को आदेश दिया कि अगली बार जब अमित शाह राज्य में हों तब वे मामले कि सुनवाई में शाह कि उपस्थित को सुनिश्चित करने का प्रयास करें . इसके बाद लोया ने मामले कि अगली सुनवाई की तारीख 15  दिसंबर 2014 तय की. लेकिन 1 दिसंबर 2014 को ही उनकी शंदिग्ध रूप से  मौत हो गई.

जस्टिस लोया की बहन ने बताया की , मोहित शाह ने कई बार देर रात कॉल करके जस्टिस लोया को सादे कपड़ों में मिलने के लिए बुलाते , तथा जल्दी और पक्ष में फैसला करने का दबाव डालते थे. अनुराधा ने बताया की मोहित शाह ने पक्ष में फैसला करने के एवज में १००
करोड़ की रकम की पेशकश भी की थी.

अनुराधा ने जानकारी दी  कि मोहित शाह ने जस्टिस लोया से कहा था कि अगर इस मामले में  फैसला 30 दिसंबर से पहले आ जाये तो इस पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा क्योंकि उस समय कोई और ऐसी सनसनीखेज स्टोरी होगी, जो सुनिश्चित करेगी कि इस बात पर लोगों का ध्यान न जाए. अनुराधा की बात का समर्थन करते हुए हुए लोया के पिता ने पुष्टि की कई बार जस्टिस लोया पर पैसे लेकर मामले को रफा दफा करने का दबाव भी बनाया गया था. लोया के पिता ने आगे कहा की मेरा बेटा ऐसे किसी प्रस्ताव के आगे नहीं झुका.‘उसने मुझे बताया कि मैं या तो इस्तीफ़ा दे दूंगा या ट्रांसफर ले लूंगा. फिर गांव चला जाऊंगा और खेती करूंगा.’

लोया की मौत के बाद एमबी गोसवी को इस केस की ज़िम्मेदारी ली , उन्होंने 15 दिसंबर को सुनवाई शुरू की. मिहिर देसाई के अनुसार , गोसवी ने बचाव पक्ष के वकीलों की अमित शाह से आरोप हटाने की दलील को  3 दिन तक सुनीं, लेकिन हैरानी कि बात है कि सीबीआई जो कि मुख्य जांच एजेंसी थी, उसकी बहस 15 मिनट में ही खत्म हो गई. सुनवाई 17  दिसंबर ख़त्म हुई , जिसमे गोसवी ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए 30 दिसंबर 2014 को अमित शाह को बरी कर दिया.

रिपोर्ट के अनुसार मोहित शाह लोया कि मौत  के लगभग दो महीने बाद उनके परिवार से मिलने पहुंचे थे. बृजगोपाल लोया के बेटे अनुज को इस बात का डर था कि उनको  या उनके परिवार में किसी को नेताओं द्वारा नुकसान पहुँचाया. ये बात अनुज  ने अपने परिवार को लिखे एक खत में कहीं थी.

अनुज ने मोहित शाह से मुलाकात के बारे में लिखा, ‘मैंने पापा की मौत की जांच के लिए उनसे जांच आयोग बनाने की मांग की है. मुझे डर है कि हमें उनके ख़िलाफ़ कुछ भी करने से रोकने के लिए वे हमारे परिवार के किसी भी सदस्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं.’

इस पत्र में दो बार यह बात कही गई है कि ‘अगर मेरे या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को कुछ होता है, तो चीफ जस्टिस मोहित शाह और इस साजिश में शामिल अन्य लोग ज़िम्मेदार होंगे.’.

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