एकजुटता बदल देगी हिन्दुस्तान की तस्वीर….

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-अनुज मिश्र

भारत की अखंडता ,एकता तोड़ने के लिए अंग्रेजों ने एक नीति बनाई कि फूट डालो और शासन करो जिसका नतीजा सभी लोगों के सामने रहा ।अंग्रेजों ने एक समुदाय को दूसरे समुदाय से लड़ाया फिर जातिवाद के नाम पर लड़ाया तो कभी धर्म के नाम पर लड़ाया और उसी तरीके से लोग लड़ते भी रहे अर्थात उनकी अपनी रणनीति थी वह कामयाब रही। आज इसी तरीके से लगातार पत्रकारिता में देखा जा रहा है कि कुछ लोगों ने एक साजिश रची और मीडिया और सोशल मीडिया के बीच विवाद शुरू करा दिया।मैं कोई नई बात नहीं आज कहने जा रहा हूं वही बात कहने जा रहा हूं जो पूरा विश्व जानता है और जन्म से पढ़ाया जाता है।समाज के संभ्रांत लोग बताते हैं कि एकता के बंधन में रहो हमेशा मिलजुल कर रहो।एक लकड़ी को तो कोई कमजोर भी तोड़ सकता है परंतु बहुत सारी लकड़ियों को अगर मिला दिया जाए तो यह ऐसा गठ्ठर बन जाता है कि एक से एक बड़ा चैंपियन पहलवान उस गठ्ठर को तोड़ नहीं पाता है और यही सही मामले में एकता कहलाती है।इस लेख के माध्यम से मैं अपने सम्मानित पत्रकार बंधुओं से निवेदन करना चाहता हूं कि हम लोगों की एकता को जिंदा रखा जाए क्योंकि पत्रकार की लेखनी में इतना दम है कि भारत को पुनः विश्व गुरु बनाया जा सकता है।भारत को सोने की चिड़िया पहले कहा ही जाता था फिर से वही मुकाम हासिल हो सकता है परंतु सभी पत्रकार बंधुओं को एक होना पड़ेगा अहम की भावना निकालनी पड़ेगी।लड़ाई हर घर में होती है परंतु इसका यह मतलब नहीं होता है कि परिवार का हिस्सा न रहे ।बर्तन तो खटकते ही हैं उसके बावजूद भी उनको एक ही पात्र में रखा जाता हैं नाकि सबको अलग-अलग।अपने इस लेख के माध्यम से एक भ्रम को दूर करने का प्रयास कर रहा हूं कि हर पत्रकार का अपना महत्व होता है राष्ट्रीय स्तर पर अलग, प्रदेश स्तर पर अलग, क्षेत्रीय स्तर पर अलग और ग्राम स्तर पर अलग और कहावत बिल्कुल यहां पर फिट बैठतीहै की जहां पर काम सुई का है वहां तलवार कैसे काम कर सकती है और जहां पर तलवार का काम है वहां पर सुई काम नहीं कर सकती।अंतरराष्ट्रीय मीडिया का रोल अलग होता है क्योंकि आप जानते हो विश्वस्तरीय समस्याओं को केवल वही दिखा सकते हैं उसका प्रसारण क्षेत्रीय मीडिया नहीं कर सकती अगर लोकल स्तर की समस्याओं को वह दिखाने का प्रयास भी करते हैं तब विश्व की पटल पर भारत की छवि ही धूमिल होगी क्योंकि भारत कृषि प्रधान देश है और गांव क्षेत्रों में ऐसी समस्याएं हैं जिनको वह दिखाकर भारत की बदनामी नहीं करेंगे।अंतरराष्ट्रीय मीडिया ,राष्ट्रीय मीडिया अपना रोल सही निभा रही परंतु जहां तक मुझे लगता है जो जनपदों में उनके प्रतिनिधि प्रतिनिधित्व कर रहे हैं कहीं न कहीं पर उनका रोल सकारात्मक नहीं है और ऐसे चंद जयचंद लोगों ने मीडिया के बीच खाई खोद रखी है मैं पूरे गर्व के साथ मैं जयचन्दों से पूंछ रहा हूं कि कितनी खबरें रोज़ की रोज़ प्रशासनिक दिखाते हो,कितनी गांव से जुड़ी दिखाते हैं और जयचंद महाराजो आप भी जानते हो कि वह आपकी खबरें दिखाई नहीं जाएंगी लेकिन आप खाई क्यों खोद रहे हो?आज समय आ गया है कि जिले में बैठे जो राष्ट्रीय मीडिया को बदनाम कर रहे हैं उनसे बिल्कुल अलग हो जाइए क्योंकि हम भी जानते हैं आप भी जानते हैं उनकी कोई छोटी ख़बर लगती ही नही।जिला प्रशासन से लेकर ग्रामीण अंचलों की समस्याएं हम दिखाते हैं ,आप दिखाते हैं जिनके माध्यम से जिला प्रशासन समाधान करता है।लगातार आप लोग देख रहे हैं कि पत्रकार सच्ची खबरों को दिखा रहा है लेकिन लोकल स्तर का होने के कारण उसके ऊपर तुरंत मुकदमा दर्ज हो जाता है यह कैसी विडंबना ?हर जनपद के जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान के द्वारा एक कमेटी बनाई जाये अगर कोई पत्रकार का मामला आये तब पहले उस पर जांच के बाद ही मुकदमा लिखा जाना चाहिए।दोषी जाहे पत्रकार हो या अन्य कोई उस पर मुकदमा दर्ज हो व कानूनी कार्यवाही हो ,उसमें कोई दिक्कत नहीं है परंतु हर खबर पर पत्रकार को निशाना बनाया जा रहा है इसका मतलब पत्रकार की कलम को कुंद किया जा रहा है।कल्पना कीजिए कि अगर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दमन हो गया तब प्रशासनिक खबरों को क्या खुद अधिकारी दिखाएंगे तब तो भारतीय संविधान में जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का बजूद है कुछ रह ही नही जाएगा अगर पत्रकार मजबूत है तभी अधिकारी मजबूत है क्योंकि उसकी उपलब्धियों को शासन -प्रशासन और जनता तक पहुंचाने का कार्य पत्रकार का है। अभी भी समय है कि सचेत हो जाओ और एकजुट होकर कार्य करो।

Anil Anup

Anil Anup

राज्य ब्यूरो प्रभारी पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर l

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