यम-द्वितीया” तथा “यमुना स्नान” के नाम से भी जाना जाता है

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अनिल अनूप 

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को Bhaiya Dooj / भैया दूज (भ्रातृ-दूज) का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को “यम-द्वितीया” तथा “यमुना स्नान” के नाम से भी जाना जाता है। भैया-दूज में बहन अपने भाई को रोली और अक्षत से तिलक लगाकर उसके उन्नत भविष्य की कामना करती है। इस अवसर पर भाई अपनी बहन को कुछ उपहार भी देता है। भाई दूज दीपावली के एक दिन बाद आने वाला ऐसा त्यौहार है, जो भाई के प्रति बहन के सहज प्रेम प्रगट करता है। बहन अपने भाई के सुख-शांति और दीर्घायु के लिए कामना करती हैं।

सूर्यदेव की पत्नी छाया की कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ। यमुना अपने भाई यमराज से मिलने के लिए बहुत ही व्याकुल रहती थी वह चाहती थी और हमेशा अपने भाई से प्रार्थना करती थी की यम मेरे घर में आकर भोजन करें और मेरा आतिथ्य स्वीकार करें परन्तु व्यस्तता के कारण यम नहीं आ पाते। एक दिन अर्थात कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम देवता ने अचानक अपनी बहन यमी के घर पहुंच गए यह देखकर यमी एकदम आश्चर्यचकित हो गई तथा आनंद विभोर होकर अपने भाई यम का स्वागत की जिससे प्रसन्न होकर यम ने यह वरदान दिया की यदि इस दिन भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी मुक्ति अवश्य होगी। इसीलिए भैया दूज (Bhaiya Dooj) के दिन यमुना नदी (Bathing in Yamuna River) में भाई-बहन के एक साथ स्नान करने का अतीव महत्त्व है और यही कारण है की इस पर्व को “यमुना स्नान” पर्व के रूप में भी जाना जाता है।

भैया दूज(Bhaiya Dooj) पर भाई अपने बहन के यहाँ क्यों जाती है ?

जब यम देवता अपनी बहन से मिले और बहन के स्वागत से प्रसन्न हुए तब यम ने वरदान मांगने के लिए कहा तब यमी ने अपने भाई से यह भी वचन लिया कि जिस प्रकार आज के दिन उसका भाई यम उसके घर आया है, हर भाई कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के द्वितीया के दिन अर्थात भाई दूज के दिन अपनी बहन के घर अवश्य ही जाए। इसी कारण उसी समय से भाई दूज मनाने की प्रथा चल पड़ी और आजतक निरंतर चली आ रही है। आज भी इस अवसर पर भाई अपनी बहन से मिलने जाते है तथा टिका लगवाकर पूजा किये हुए प्रसाद खाते है तथा उपहार भी अपनी बहन को देते है। बहनें पीढियों पर चावल के घोल से चौक बनाती हैं और इस चौक पर भाई को बैठा कर बहनें उनके हाथों की पूजा करती हैं।

भैया दूज (Bhaiya Dooj) को “भाई दूज” तथा “भ्रातृ दूज” भी कहा जाता है। इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य भाई और बहन के सहज स्नेह को सुव्यवस्थित स्थापित करना है। वस्तुतः इस दिन बहन अपने भाई की स्वास्थ्य तथा लम्बी उम्र के लिए भगवान से कामना करती है।

भैया दूज(Bhaiya Dooj) के दिन बहन भाई के लिए “गोधन” कूटती हैं। गोधन में बहन गाय के गोबर से मानव की मूर्ति बनाकर छाती पर ईट रखती है पुनः उस ईट को मूसल से तोड़ती है। उसके बाद मटर के दाने से पूजती है और भटकैया/ रेंगनी के कांटे से जिह्वा को दागती है। यही नहीं इस दिन बहन काल्पनिक रूप से सबसे पहले भाई को मारती है उसके बाद पुनः अपने भाई को जिन्दा करती है। ऐसा करके बहन भाई की दीर्घायु की कामना करती है। इस प्रकार दोपहर तक पूजा समाप्त हो जाने पर बहन भाई को तिलक लगाकर मिष्टान तथा मटर दाना जिसे बजरी भी कहा जाता है खिलाती है। इस तरह से भाई दूज पर्व मनाने का विधान है।

भैया दूज (Bhaiya Dooj) पर भाई को क्या-क्या करना चाहिए ?

भाई को अपने बहन के पास जाना चाहिए।
भाई को अपने बहन के साथ यमुना नदी में नहाना चाहिए यदि ऐसा न हो सके तो बहन के घर जाकर ही नहा लेना चाहिए।
इस दिन बहन के घर जाकर भोजन करना चाहिए यदि बहन आपके घर ही है तो बहन के हाथ का बना भोजन प्रसन्नचित्त होकर खाना चाहिए।
यदि आप बहन के घर नहीं जा सके तो भाई को चाहिए की बहन का ध्यान कर उसके समीप बैठकर भोजन कर लेना भी शुभ होता है।

Anil Anup

Anil Anup

राज्य ब्यूरो प्रभारी पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर l

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